एबीसी नेशनल न्यूज 25 जनवरी 2026
मुंबई। आज के भारत में अगर कोई सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करे, तो उसके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ऐसा ही कुछ लंदन में रहने वाले भारतीय मूल के डॉक्टर और यूट्यूबर संग्राम पाटिल के साथ हुआ। संग्राम पाटिल ब्रिटिश नागरिक हैं और ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में कंसल्टेंट डॉक्टर हैं। वे यूट्यूब पर बीजेपी सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। 10 जनवरी को वे अपनी पत्नी (जो खुद भी डॉक्टर हैं) के साथ मुंबई पहुंचे। लेकिन एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया।
इसके बाद उन्हें क्राइम ब्रांच ले जाया गया, जहां करीब 15 घंटे तक उनसे पूछताछ होती रही। देर रात उन्हें छोड़ा गया। पुलिस ने साफ किया कि संग्राम पाटिल को गिरफ्तार नहीं किया गया था। उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया था। इस धारा के तहत मामूली मामलों में पुलिस पूछताछ कर सकती है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया और उसी दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार की आलोचना करने वालों को डराने और दबाने की कोशिश हो रही है।
संग्राम पाटिल का कहना है कि वे सिर्फ अपनी राय रखते हैं और लोकतंत्र में बोलने की आज़ादी होनी चाहिए। उनके समर्थकों का भी यही कहना है कि किसी को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एयरपोर्ट पर रोकना और घंटों बैठाकर पूछताछ करना ठीक नहीं है। यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्ता की असहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




