रियाद 22 सितंबर 2025
खुशबू की दुनिया: ऊद और बुखूर का जादू
अगर सऊदी अरब की पहचान को एक खुशबू में समेटना हो तो वह खुशबू होगी ऊद और बुखूर की। ऊद को यहां ‘तरल सोना’ भी कहा जाता है। यह महंगी और दुर्लभ लकड़ी से निकला एक ऐसा अर्क है, जिसकी सुगंध आत्मा तक उतर जाती है। सऊदी के शाही महलों से लेकर आम घरों तक, हर खास मौके पर ऊद और बुखूर की धूप जलाई जाती है। इससे निकलने वाली सुगंध वातावरण को पवित्र और मोहक बना देती है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक जब सऊदी के सूक में इनकी दुकानों से गुजरते हैं तो मानो पूरा शहर ही खुशबू में नहाया हुआ लगता है। यही वजह है कि ऊद-परफ्यूम और बुखूर गिफ्ट देने के लिए सबसे खास तोहफों में गिने जाते हैं।
मिठास का खजाना: खजूर का अटूट रिश्ता
खजूर सऊदी अरब का दिल है। अजवा, सुकरी, मेदजूल जैसी दर्जनों किस्में यहां उपलब्ध हैं, जो स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम हैं। खजूर को इस्लामी परंपराओं में पवित्र माना जाता है और रमजान के रोज़ा खोलने से लेकर हर उत्सव में इसका इस्तेमाल होता है। सऊदी की गलियों में पैकिंग किए हुए शानदार गिफ्ट बॉक्स से लेकर ताजे-तरोताज़ा खजूर तक सब कुछ मिलता है। कहा जाता है कि खजूर न केवल ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं। घर ले जाकर जब इनका स्वाद लिया जाता है तो वह सिर्फ फल नहीं होता, बल्कि सऊदी की मिट्टी और धूप का स्वाद भी साथ लाता है।
सोने की चमक: वैभव और विरासत का प्रतीक
सऊदी अरब को अगर ‘सोने का देश’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा। रियाद और जेद्दा के गोल्ड सूक दुनिया भर में मशहूर हैं। यहां पारंपरिक अरब डिज़ाइन से लेकर मॉडर्न ज्वेलरी तक हर चीज़ मिलती है। सोने की शुद्धता और नाप-तौल पर सऊदी का भरोसा इतना मजबूत है कि यहां का सोना निवेश के लिहाज से भी सुरक्षित माना जाता है। शादी-ब्याह के मौके पर खरीदे गए आभूषण सिर्फ गहने नहीं रहते, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली धरोहर बन जाते हैं। हर दुकान के शोकेस में चमचमाते गहनों को देखकर लगता है मानो सोना सिर्फ धातु नहीं, बल्कि सऊदी की संस्कृति की आत्मा है।
परंपरा और फैशन का संगम: अबाया और थॉब
सऊदी अरब की पारंपरिक पोशाकें अपने आप में शान और सादगी दोनों का मेल हैं। महिलाओं के लिए अबाया एक ऐसा परिधान है, जिसमें परंपरा, धार्मिक गरिमा और आधुनिक फैशन का अनोखा संगम दिखता है। काले रंग के लंबे इस परिधान में आजकल चमकदार कढ़ाई, मोतियों और आधुनिक डिज़ाइनों की खूबसूरती झलकती है। वहीं पुरुषों का थॉब उनकी सादगी और शालीनता का प्रतीक है—सफेद, ग्रे या हल्के रंगों का यह लिबास सऊदी की संस्कृति को बखूबी दर्शाता है। अबाया और थॉब खरीदना सिर्फ कपड़े लेना नहीं, बल्कि अरब की परंपरा को घर लेकर जाना है।
हस्तशिल्प और मसाले: अरब की असली आत्मा
सऊदी के पारंपरिक बाजारों में घूमना किसी टाइम मशीन से गुज़रने जैसा अनुभव देता है। यहां हाथ से बुने कालीन, रंग-बिरंगे मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के नक्काशीदार सामान और चमड़े के बैग मिलते हैं। लेकिन सबसे खास हैं सऊदी मसाले। कब्सा मसाला, बहारत और अरबी कॉफी में डाला जाने वाला इलायची-पिसा मिश्रण—ये सब सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि पूरे भोजन का अनुभव बदल देते हैं। इन मसालों को घर ले जाना मानो सऊदी के स्वाद और सुगंध को अपने रसोईघर में बसाना है।
आधुनिकता और परंपरा का संगम: मॉल्स बनाम सूक
आज का सऊदी सिर्फ परंपरा में नहीं रुक गया है, बल्कि आधुनिकता को भी खुले दिल से अपनाया है। रियाद, जेद्दा और मदीना के मॉल्स में आपको दुनिया के हर बड़े ब्रांड मिल जाएंगे—Gucci, Prada, Louis Vuitton से लेकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स तक। लेकिन जब आप पुराने सूक की गलियों में कदम रखते हैं, तो वहां हर दुकान एक अलग कहानी कहती है। पारंपरिक बाजारों का शोर, bargaining की आवाजें और मसालों की खुशबू, ये सब मिलकर खरीददारी को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।
कहाँ और कैसे करें खरीददारी?
मदीना के सूक: खजूर, मसाले और सोने के लिए बेहतरीन जगह।
रियाद के मॉल्स: लग्ज़री ब्रांड्स और आधुनिक शॉपिंग का अनुभव।
जेद्दा का बलद इलाका: हस्तशिल्प और पारंपरिक सामान के लिए मशहूर।
बाथा मार्केट (रियाद): बजट-फ्रेंडली इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों के लिए आदर्श।
खरीददारी का अनुभव: सामान से बढ़कर यादें
सऊदी अरब में शॉपिंग सिर्फ ‘खरीदने-बेचने’ का अनुभव नहीं है। यह एक संस्कृति से जुड़ने की यात्रा है। जब आप ऊद की बोतल खोलते हैं, तो उसमें सिर्फ खुशबू नहीं, अरब की आत्मा भी मिलती है। खजूर के हर दाने में मिठास के साथ-साथ सऊदी की धूप और परंपरा छुपी होती है। सोने के गहनों की चमक सिर्फ धन नहीं, बल्कि विरासत का आभास देती है। और अबाया या थॉब पहनना मानो सऊदी की संस्कृति को जीने जैसा है। यही वजह है कि जो यात्री यहां से सामान लेकर लौटते हैं, उनके साथ हमेशा एक टुकड़ा सऊदी अरब भी लौटता है।




