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फैटी लिवर: एक खामोश बीमारी, जो अनदेखी में जानलेवा बन सकती है

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(डॉ. संजना एम. शेनॉय, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के शोध और अनुभव पर आधारित)

एबीसी डेस्क 7 जनवरी 2026

आज की बदलती जीवनशैली में फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी बन चुकी है, जो बिना शोर किए शरीर के भीतर धीरे-धीरे जड़ें जमाती है। खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता तनाव हमारे लिवर को उस मोड़ पर ले जा रहे हैं, जहां वह अपनी मूल जिम्मेदारियां निभाने में कमजोर पड़ने लगता है। फैटी लिवर का मतलब है—लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाना। शुरुआत में यह स्थिति साधारण लगती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही बीमारी लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।

लिवर हमारे शरीर का सबसे मेहनती अंग है। यह खून को साफ करता है, विषैले तत्वों को बाहर निकालता है, भोजन से मिले पोषक तत्वों को प्रोसेस करता है, पित्त बनाता है, ब्लड शुगर को संतुलित रखता है और शरीर की कई अहम जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। लेकिन जब लिवर में चर्बी जमा होने लगती है, तो यह पूरा संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ने लगता है।

फैटी लिवर क्या है और यह क्यों बढ़ रहा है?

फैटी लिवर उस स्थिति को कहते हैं, जब लिवर की कोशिकाओं (हेपाटोसाइट्स) में 5% से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। यह स्थिति आज दुनिया भर में तेजी से फैल रही है। कारण साफ है—हमारी जीवनशैली। जंक फूड, मीठे पेय, लंबे समय तक बैठकर काम करना और व्यायाम की कमी ने फैटी लिवर को एक लाइफस्टाइल डिजीज बना दिया है।

एक समय था जब इसे केवल शराब से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इसकी चपेट में हैं, जो शराब नहीं पीते। इसे नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने इसे और स्पष्ट रूप से समझने के लिए एक नया नाम दिया है—MAFLD (Metabolic Dysfunction Associated Fatty Liver Disease), जो मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से जुड़ा है।

फैटी लिवर के प्रकार: बीमारी के कई चेहरे यानि फैटी लिवर केवल एक तरह का नहीं होता :— 

  1. एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (ALD): लंबे समय तक ज्यादा शराब पीने से लिवर को नुकसान पहुंचता है, जो जानलेवा भी हो सकता है।
  2. नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD): बिना शराब के भी गलत खान-पान और मोटापे की वजह से होने वाला फैटी लिवर।
  3. MAFLD: जब फैटी लिवर के साथ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे मेटाबॉलिक रोग भी जुड़े हों।
  4. प्रेग्नेंसी से जुड़ा फैटी लिवर (AFLP): गर्भावस्था के आखिरी महीनों में होने वाली दुर्लभ लेकिन खतरनाक स्थिति।
  5. टॉक्सिकेंट-एसोसिएटेड फैटी लिवर (TAFLD): जहरीले रसायनों, दवाओं, प्रदूषण और भारी धातुओं के संपर्क से होने वाला फैटी लिवर।

कौन-सी आदतें फैटी लिवर को जन्म देती हैं?

फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण हमारा भोजन है। जरूरत से ज्यादा कैलोरी, अधिक फैट और कार्बोहाइड्रेट लिवर को थका देते हैं। बिस्कुट, केक, चिप्स, फ्राइड फूड, मैदा, सफेद चावल, मीठे पेय, हाई फ्रक्टोज कॉर्न सिरप, रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट—ये सभी लिवर में चर्बी बढ़ाते हैं। इसके साथ ही फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी समस्या को और गंभीर बना देती है।

वजन, कमर और मेटाबॉलिक रोग: छुपे हुए खतरे

मोटापा फैटी लिवर का सबसे बड़ा जोखिम है, खासकर पेट की चर्बी। महिलाओं में 35 इंच और पुरुषों में 39 इंच से ज्यादा कमर का घेर फैटी लिवर का संकेत हो सकता है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, PCOS, थायरॉइड की समस्या, नींद में सांस रुकना—ये सभी बीमारियां फैटी लिवर को बढ़ावा देती हैं।

हैरानी की बात यह है कि बहुत तेजी से वजन घटाना या कुपोषण भी फैटी लिवर को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए वजन घटाना हमेशा डॉक्टर और डाइटीशियन की निगरानी में होना चाहिए।

फैटी लिवर के चार चरण: समय रहते संभलना जरूरी

  1. स्टेज-1 (फैटी लिवर): केवल फैट जमा होता है, पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
  2. स्टेज-2 (NASH): लिवर में सूजन शुरू हो जाती है, फिर भी रिवर्स संभव है।
  3. स्टेज-3 (फाइब्रोसिस): लिवर में जख्म पड़ने लगते हैं, नुकसान आंशिक रूप से स्थायी हो सकता है।
  4. स्टेज-4 (सिरोसिस): लिवर बुरी तरह खराब, कैंसर और लिवर फेल्योर का खतरा।

लक्षण क्यों नहीं दिखते? यही है सबसे बड़ा खतरा

फैटी लिवर को “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है। शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं होते। हल्की थकान या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द को लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जब आंखें पीली पड़ने लगें, पेट में पानी भरने लगे या भ्रम की स्थिति बने—तब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

इलाज नहीं, जीवनशैली ही असली दवा

फैटी लिवर का सबसे बड़ा इलाज दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और शुगर से दूरी—यही असली इलाज है। नट्स, बीज, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, मछली और कम फैट वाला भोजन लिवर को ठीक करने में मदद करता है। शराब, चीनी, ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर फैटी लिवर को शुरुआती चरण में पूरी तरह पलटा जा सकता है।

फैटी लिवर हमें यह सिखाता है कि शरीर की खामोशी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। लिवर तब तक शिकायत नहीं करता, जब तक हालात बहुत बिगड़ न जाएं। अगर आज हम अपनी आदतें सुधार लें, तो न सिर्फ फैटी लिवर बल्कि लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी खुद को बचा सकते हैं। याद रखिए—सेहत में किया गया छोटा सा बदलाव, जिंदगी को बड़ा सहारा दे सकता है।

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