ब्रुसेल्स, 19 सितम्बर 2025
रूस के खिलाफ यूरोप ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। यूक्रेन पर जारी युद्ध के बीच यूरोपीय आयोग (European Commission) ने रूस को झकझोरने वाला 19वां प्रतिबंध पैकेज पेश कर दिया है। यह कदम सीधा-सीधा रूस की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा निर्यात पर चोट करने वाला है।
एलएनजी आयात पर सीधा प्रहार
अब तक रूस यूरोप को तरल प्राकृतिक गैस (LNG) बेचकर मोटी कमाई करता रहा, लेकिन आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि 1 जनवरी 2027 से LNG आयात पूरी तरह बंद कर दिया जाए। पहले यह समयसीमा 2028 तय थी, लेकिन अब यूरोप ने एक साल पहले ही दरवाजा बंद करने का फैसला किया है। यह रूस की गैस अर्थव्यवस्था के लिए करारी मार होगी।
ऊर्जा कंपनियों और शैडो फ्लीट पर शिकंजा
रूस की तथाकथित “शैडो फ्लीट” यानी पुराने टैंकरों के जरिए कच्चा तेल और गैस बेचने की चालाकी पर यूरोप ने नजर गड़ा दी है। Rosneft और Gazprom Neft जैसी दिग्गज ऊर्जा कंपनियों पर भी लेन-देन रोकने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी रूस की ऊर्जा मशीनरी की धड़कन पर सीधा वार।
बैंकिंग और क्रिप्टो पर रोक
नया पैकेज केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। इसमें रूस और उसके सहयोगी मध्य एशियाई बैंकों को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देनों पर कड़ा नियंत्रण लगाने की योजना है ताकि रूस छिपकर वित्तीय संसाधन न जुटा सके।
यूक्रेनी बच्चों के अपहरण पर कड़ा रुख
यूरोपीय आयोग ने उन व्यक्तियों को भी प्रतिबंध सूची में डालने का प्रस्ताव किया है जिन पर आरोप है कि वे यूक्रेनी बच्चों को जबरन रूस ले जाकर उन्हें ब्रेनवॉश करने की गतिविधियों में शामिल हैं। यह मानवीय दृष्टि से यूरोप का सख्त संदेश है कि युद्ध अपराध बर्दाश्त नहीं होंगे।
रूस की फ्रीज़ संपत्तियों का उपयोग
सबसे बड़ा और रणनीतिक कदम है — रूस के फ्रीज़ किए गए केंद्रीय बैंक के अरबों डॉलर को एक “रिपेरेशन्स लोन” के रूप में यूक्रेन को देने की तैयारी। युद्ध खत्म होने के बाद यह पैसा रूस से मुआवज़े के रूप में वसूला जाएगा।
चुनौतियां और विरोध
हालांकि, इस पैकेज पर हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश रुकावट डाल सकते हैं क्योंकि वे अभी भी रूस की ऊर्जा पर निर्भर हैं। लेकिन यूरोपीय नेतृत्व साफ संकेत दे चुका है कि अब रूस के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं होगी।
असर और नतीजा
- रूस की ऊर्जा आय पर सीधा प्रहार होगा।
- यूरोप को अपनी गैस आपूर्ति के नए स्रोत खोजने होंगे।
- विश्व ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ेगी और रूस पर राजनीतिक-आर्थिक दबाव कई गुना बढ़ेगा।




