Home » National » एपस्टीन का दबाव: “बैनन, तुम्हें मोदी से मिलना होगा”—ईमेल लीक से हड़कंप

एपस्टीन का दबाव: “बैनन, तुम्हें मोदी से मिलना होगा”—ईमेल लीक से हड़कंप

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

अंतरराष्ट्रीय डेस्क 21 नवंबर 2025

अंतरराष्ट्रीय राजनीति, खुफ़िया लॉबी और कारोबारी नेटवर्क के बीच छिपे रिश्तों पर एक नया धमाकेदार खुलासा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया प्लेटफ़ॉर्म DropSite News द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि बदनाम वित्तपोषक जेफ्री एपस्टीन ने 2019 में अपनी गिरफ्तारी से पहले पूर्व ट्रम्प सलाहकार स्टीव बैनन पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करवाने का दबाव बनाया था। लीक हुए ईमेल और टेक्स्ट मैसेजेस यह दिखाते हैं कि एपस्टीन सिर्फ अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े प्रभावशाली नामों से ही नहीं, बल्कि भारतीय भू-राजनीति में भी सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट का दावा है कि एपस्टीन ने भारत-इज़राइल संबंधों, वैश्विक रक्षा व्यापार और एक शक्तिशाली भारतीय कारोबारी के साथ संयुक्त प्रोजेक्ट को लेकर पर्दे के पीछे कई चर्चाएँ की थीं।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमेटी द्वारा जारी दस्तावेज़ों में एपस्टीन और बैनन के बीच कई ईमेल दर्ज हैं, जिनमें एपस्टीन बार-बार यह कहता है—“I can set…” और “you should meet with Modi.” यह स्पष्ट संकेत है कि एपस्टीन खुद को ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहा था, जो अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बीच गुप्त और उच्च-स्तरीय बैठक सेट कर सकता है। इन संदेशों की टाइमलाइन बेहद अहम है—ये मैसेज मई 2019 के हैं, ठीक उसी समय जब भारत में आम चुनाव चल रहे थे और वैश्विक राजनीति में मोदी की भूमिका लगातार मज़बूत हो रही थी। यह पूरा मामला इस बात की झलक देता है कि एपस्टीन किस तरह दुनिया भर के शक्तिशाली नेताओं और बिज़नेस समूहों के बीच अनौपचारिक ‘पावर ब्रोकिंग’ की कोशिश करता था।

दस्तावेज़ों से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन सिर्फ अमेरिकी राजनीति में ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीतिक और कारोबारी हलकों में भी अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ था। एक ईमेल में वह भारत-इज़राइल रक्षा गठजोड़, एक भारतीय अरबपति और इज़राइल की सरकारी रक्षा कंपनी के बीच चल रहे संयुक्त प्रोजेक्ट पर चर्चा करता दिखाई देता है। इस तरह के दस्तावेज़ यह दिखाते हैं कि एपस्टीन के पास इज़राइली खुफ़िया प्रतिष्ठान के शीर्ष लोगों से लेकर भारतीय राजनीतिक-कॉर्पोरेट जगत तक गहरी पहुँच थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि एपस्टीन कई वर्षों से इज़राइल की खुफ़िया एजेंसियों, तकनीकी व्यापार समूहों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली लोगों के संपर्क में था—और उसकी भारत में सक्रियता तब और बढ़ी जब नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच रणनीतिक संबंधों में तेज़ी आ रही थी।

इन खुलासों ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एपस्टीन वास्तव में भारत की किस राजनीतिक या कूटनीतिक दिशा को प्रभावित करना चाहता था। क्या वह केवल नेटवर्किंग कर रहा था, या पर्दे के पीछे किसी व्यापक एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी थी? दस्तावेज़ों से यह भी संकेत मिलता है कि एपस्टीन भारतीय राजनीति में रुचि सिर्फ जिज्ञासा के तौर पर नहीं ले रहा था—बल्कि उसे ऐसे हाई-प्रोफ़ाइल संपर्क चाहिए थे जिनसे वह वैश्विक स्तर पर अपने प्रभाव, सौदों और व्यापारिक नेटवर्क को और मजबूत बना सके।

स्टीव बैनन और मोदी के बीच मुलाक़ात का आयोजन वास्तव में हुआ या नहीं—इसकी जानकारी दस्तावेज़ों में नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस स्तर पर सिर्फ “प्रस्ताव” ही अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति को समझने के लिए पर्याप्त संकेत देता है। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में एपस्टीन के पुराने नेटवर्क, उसके संपर्कों और उसके कथित खुफ़िया संबंधों की नए सिरे से जांच हो रही है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गतिविधि नहीं बल्कि वैश्विक सत्ता-नेटवर्क के जटिल ताने-बाने को समझने की नई दिशा है।

इन दस्तावेजों से यह साफ है कि दुनिया की राजनीति के सबसे ऊपरी स्तर पर भी ऐसे अनौपचारिक ‘पावर ब्रोकर्स’ मौजूद होते हैं जो नेता, पूंजी और खुफ़िया नेटवर्क के बीच पुल का काम करते हैं—चाहे वह पुल कितना ही विवादास्पद, अस्पष्ट या खतरनाक क्यों न हो। एपस्टीन की यह कथित कोशिश भारतीय राजनीति में एक और रहस्यमयी अध्याय जोड़ती है, जिस पर आने वाले दिनों में और भी प्रतिक्रियाएं और जांचें देखने को मिल सकती हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments