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मनरेगा का अंत

मनरेगा का अंत, बापू का अपमान, जन आंदोलन से जीतेंगे हम: खड़गे

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महेंद्र कुमार | नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025

नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जबरदस्त गुस्सा फूटा। खड़गे ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का दम घोंट कर देश की अवाम के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मनरेगा को सरकार ने समाप्त किया है इससे न केवल महात्मा गांधी का अपमान हुआ है बल्कि देश की जनता के पीठ में भी खंजर भौंकने का काम किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस तरह कृषि के तीन काले कानूनों को जन आंदोलन से खत्म कराया गया था, उसी प्रकार आंदोलन कर नए कानून को खत्म कर फिर से मनरेगा शुरू कराने की जरूरत है। सोनिया गांधी के विचारों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा ने लोगों को “काम का अधिकार” दिया। इसे खत्म करना केवल नीतिगत भूल नहीं, एक नैतिक पराजय है, जिसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ेंगे।

गरीब बनाम पूंजीपति की राजनीति

कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की अहम बैठक में उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा एक योजना का अंत नहीं, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों और मूल्यों का अपमान है। मनरेगा सिर्फ रोजगार की योजना नहीं थी। यह गांधी जी के “सर्वोदय” के विचार का साकार रूप थी—जिसमें समाज के आखिरी आदमी की चिंता जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए खड़गे ने कहा, “सरकार को गरीबों के चूल्हे की नहीं, कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों की तिजोरियों की चिंता है।” उन्होंने गांधी जी का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यवस्था आम जनता के साथ साझा न हो सके, वह टिकाऊ नहीं होती। आज ‘काम के अधिकार’ पर सुनियोजित हमला हो रहा है, जो लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।

मनरेगा ने बदली थी जमीनी हकीकत

अपने श्रम मंत्री के कार्यकाल को याद करते हुए खड़गे ने कहा कि मनरेगा की गूंज देश-विदेश तक थी। इस योजना ने गांवों से शहरों की ओर मजबूर पलायन को रोका, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं को सम्मान दिया, और लाखों परिवारों को यह भरोसा दिया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि आज जिन युवाओं के हाथ में किताबें हैं, उनमें से कई के माता-पिता ने मनरेगा की मजदूरी से ही उन्हें पढ़ाया। खड़गे ने हुंकार भरते हुए कहा कि जैसे किसानों के साथ मिलकर कांग्रेस ने काले कृषि कानूनों को वापस करवाया, वैसे ही मनरेगा के लिए भी देशव्यापी जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं—मोदी सरकार को मनरेगा बहाल करनी ही होगी।

संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का आह्वान

बैठक के अंत में खड़गे ने कार्यकर्ताओं से कहा कि लड़ाई सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी। अगले 120 दिनों में देशभर के सभी जिलों में संगठनात्मक नियुक्तियां पूरी की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया—अब ब्लॉक और बूथ स्तर पर उतरकर जनता के हक की लड़ाई लड़नी होगी, मजबूती और साहस के साथ।

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