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लोकसभा में कांग्रेस के 8 सांसद निलंबित, राहुल–प्रियंका का मकर द्वार पर धरना

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एबीसी नेशनल न्यूज | 3 फरवरी 2026

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सवाल

नई दिल्ली। बजट सत्र के बीच मंगलवार को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। शोर-शराबे और अव्यवस्था के बाद कांग्रेस के आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक चल रही थी। आरोप है कि कुछ विपक्षी सांसदों ने कागज फाड़कर स्पीकर की कुर्सी की ओर फेंके, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वाड़िंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, सी. किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत यादवराव पाडोले, डीन कुरियाकोसे और माकपा के एस. वेंकटेसन शामिल हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा और जल्दबाजी में की गई, जबकि सरकार का तर्क है कि सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

यह पूरा विवाद उस वक्त भड़का जब नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi लोकसभा में बोलने के लिए खड़े हुए। वे 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद पर बात करना चाहते थे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरावणे की अप्रकाशित संस्मरणों का हवाला दे रहे थे। विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को पूरी बात रखने से रोक दिया गया, जबकि सत्ता पक्ष के अन्य सदस्यों को बोलने का मौका दिया गया। इसी को लेकर सदन में हंगामा तेज हो गया।

निलंबन के विरोध में राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi Vadra और अन्य कांग्रेस सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सिर्फ सांसदों के निलंबन के खिलाफ नहीं था, बल्कि हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में भी था। कांग्रेस का कहना है कि यह समझौता भारतीय किसानों और छोटे उद्योगों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म करने की बात कही गई है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह व्यापार समझौता जल्दबाजी में किया गया है और इसके पीछे देशहित नहीं, बल्कि बाहरी दबाव हैं। कांग्रेस की मांग है कि इस समझौते का पूरा ब्योरा संसद के सामने रखा जाए और इस पर खुली व विस्तृत बहस हो, ताकि देश को सच्चाई पता चल सके।

वहीं, प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में हर सांसद को अपनी बात रखने का अधिकार है। अगर विपक्ष को बोलने से रोका जाएगा और सवाल उठाने पर निलंबित किया जाएगा, तो यह संसदीय लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार जवाबदेही से बचने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है।

हंगामे और प्रदर्शन के बीच लोकसभा को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह न तो चुप बैठेगा और न ही पीछे हटेगा। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह संसद के भीतर और बाहर, दोनों जगह देश के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि बजट सत्र के बीच संसद में तनाव लगातार बढ़ रहा है और व्यापार व राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीतिक टकराव गहराता जा रहा है।

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