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DSP कल्पना वर्मा पर लगाए गए ‘लव ट्रैप’ आरोपों की पोल खुली, दीपक की सच्चाई सामने आते ही कोर्ट ने जारी किया वारंट

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एबीसी डेस्क 12 दिसंबर 2025

छत्तीसगढ़ की DSP कल्पना वर्मा के खिलाफ लगाए गए कथित ‘लव ट्रैप’ आरोपों का सच अब सामने आ गया है। जिस व्यक्ति दीपक ने यह आरोप लगाए थे, उसकी असलियत उजागर होने के बाद मामला बिल्कुल उलट गया है। अदालत ने गहरी जांच के बाद पाया कि आरोप बेबुनियाद थे और पूरे मामले में दीपक ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया था। इसके बाद कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे और स्थानीय प्रशासन में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला शुरुआत से ही काफी चर्चा में रहा था।

याद रहे कि कुछ महीने पहले दीपक ने DSP कल्पना वर्मा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उसे ‘लव ट्रैप’ में फंसाया और मानसिक उत्पीड़न किया। मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और कल्पना वर्मा की छवि को गंभीर चोट पहुंची। उस समय दीपक ने कई तरह की कहानियाँ बनाकर यह आरोप साबित करने की कोशिश की, लेकिन जांच आगे बढ़ते ही एक-एक करके आरोप झूठे साबित होने लगे। पुलिस ने फोन रिकॉर्ड, संदेश, और दोनों के बीच हुई बातचीत के तथ्यों की जांच की, जिसमें साफ पता चला कि दीपक खुद ही परेशान करने वाली हरकतें कर रहा था और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा था।

कोर्ट ने पाया कि दीपक ने न सिर्फ गलत जानकारी दी, बल्कि DSP कल्पना वर्मा की छवि खराब करने की भी साज़िश रची थी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी प्रतिष्ठित अधिकारी पर झूठा आरोप लगाना एक गंभीर अपराध है और इसका असर उनके करियर और समाज में उनकी प्रतिष्ठा पर पड़ता है। इसी वजह से कोर्ट ने दीपक के खिलाफ वारंट जारी कर दिया, ताकि उसे गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

कोर्ट के इस फैसले से DSP कल्पना वर्मा को बड़ी राहत मिली है। उनके सहयोगियों ने भी कहा कि कल्पना वर्मा एक ईमानदार और सख्त अधिकारी हैं, जिन पर ऐसे आरोप लगना दुखद था। अब सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस विभाग में यह संदेश गया है कि किसी भी अधिकारी को बदनाम करने की कोशिश को अदालत हल्के में नहीं लेगी।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं कि सोशल मीडिया पर बिना जांच-पड़ताल के लगाए गए आरोप कैसे किसी की प्रतिष्ठा पर भारी असर डाल सकते हैं। अदालत के आदेश ने साफ कर दिया है कि झूठे आरोप लगाने वालों पर भी कठोर कार्रवाई होगी, ताकि ऐसे मामलों में न्याय और सत्य दोनों की रक्षा हो सके।

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