एबीसी नेशनल न्यूज 10 जनवरी 2026
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के एक बयान ने देश की राजनीति, बौद्धिक जगत और सोशल मीडिया में तीखी बहस छेड़ दी है। भारत मंडपम में आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2.0 के उद्घाटन समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने इतिहास, सभ्यता और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में “बदला” जैसे शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर समर्थक और आलोचक आमने-सामने आ गए हैं। डोभाल ने कहा कि अतीत में सुरक्षा खतरों को नज़रअंदाज़ करने की कीमत भारत ने चुकाई है और युवाओं के भीतर “आग” होनी चाहिए ताकि देश हर मोर्चे पर मजबूत बन सके।
डोभाल ने क्या कहा: इतिहास, पीड़ा और ‘बदला’ शब्द
अपने भाषण में डोभाल ने भारत की प्राचीन सभ्यता को शांतिपूर्ण बताते हुए कहा, “हमारे गांव जलाए गए, हमारी सभ्यता नष्ट की गई, हमारे मंदिर लूटे गए और हम चुपचाप देखते रहे। हमारे पूर्वजों ने अपमान, विनाश और बलिदान सहे।” उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सभ्यता ने कभी किसी का मंदिर नहीं तोड़ा और न ही किसी विदेशी भूमि पर आक्रमण किया। इसी क्रम में युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा, “युवाओं के अंदर आग होनी चाहिए… हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा। बदला अच्छा शब्द नहीं है, लेकिन यह एक बड़ी ताकत बन सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह “बदला” सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय शक्ति से जुड़ा होना चाहिए।
स्वतंत्रता संग्राम और मजबूत नेतृत्व का संदर्भ
डोभाल ने महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को भूलना किसी भी राष्ट्र के लिए त्रासदी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि आज भारत को ऐसी लीडरशिप मिली है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ा रही है। उनके मुताबिक, देश को कमजोर मानसिकता से निकालकर आत्मविश्वास और सामर्थ्य की ओर ले जाना जरूरी है।
आलोचकों की आपत्ति: बदले की भाषा या युवाओं का भविष्य?
बयान के बाद आलोचकों ने सवाल उठाया कि आज के युवाओं का लक्ष्य अतीत का बदला नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित भविष्य होना चाहिए। कई शिक्षाविदों और विश्लेषकों ने “बदला” शब्द को भड़काऊ और संवेदनशील बताया। उनका तर्क है कि इतिहास से सीख लेना जरूरी है, लेकिन बदले की भावना युवाओं को विभाजन और आक्रोश की दिशा में ले जा सकती है—खासतौर पर ऐसे समय में जब बेरोज़गारी और आर्थिक अनिश्चितता बड़ी चुनौतियां हैं।
परिवार के बिज़नेस पर पुराना विवाद फिर चर्चा में
डोभाल का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब उनके परिवार के व्यवसाय से जुड़े पुराने विवाद फिर सुर्खियों में हैं। 2019 में द कारवां की रिपोर्ट “The D-Companies” में दावा किया गया था कि उनके छोटे बेटे विवेक डोभाल कैमन आइलैंड्स में GNY Asia Fund नामक हेज फंड से जुड़े हैं, जो नोटबंदी के 13 दिन बाद पंजीकृत हुआ था। कैमन आइलैंड्स को टैक्स हेवन माना जाता है, इसी कारण यह मुद्दा विवादित बना।
शौर्य डोभाल और विदेशी निवेश से जुड़े आरोप
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बड़े बेटे शौर्य डोभाल—जो उत्तराखंड BJP के कार्यकारी सदस्य और India Foundation से जुड़े हैं—का संबंध Torch Investment जैसी सिंगापुर-आधारित कंपनी से रहा, जिसकी चेयरमैनशिप सऊदी प्रिंस मिशाल बिन अब्दुल्लाह अल सऊद के पास थी। आलोचकों ने इसे उस पृष्ठभूमि में उठाया, जब अजित डोभाल स्वयं टैक्स हेवन्स और ब्लैक मनी के खिलाफ सख्ती की वकालत कर चुके थे।
डोभाल परिवार का पक्ष और कानूनी स्थिति
डोभाल परिवार ने आरोपों को गलत, भ्रामक और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। विवेक डोभाल ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था और 2020 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने माफी भी मांगी थी। कानूनी रूप से कैमन आइलैंड्स में फंड रजिस्टर करना अवैध नहीं है और कई अंतरराष्ट्रीय फंड्स वहां पंजीकृत हैं, लेकिन नैतिक और राजनीतिक बहस बनी रही है।
इतिहास की जटिलता और ‘बदला’ की बहस
इतिहासकारों का कहना है कि भारत का अतीत एक-रेखीय नहीं रहा। मुगलों से पहले भी आंतरिक युद्ध हुए और मुगल दरबार में राजा मान सिंह, टोडर मल, बीरबल जैसे हिंदू उच्च पदों पर थे। लूट और युद्ध लगभग हर साम्राज्य में हुए, इसलिए इतिहास को केवल बदले के चश्मे से देखना सरलीकरण होगा।
प्रेरणा या विभाजन?
डोभाल का बयान राष्ट्रवाद, स्मृति और शक्ति की बात करता है, लेकिन “बदला” शब्द ने उसे विवादास्पद बना दिया है। परिवार के व्यवसाय से जुड़े पुराने आरोपों के पुनरुत्थान ने बहस को और तेज किया है। समर्थक इसे युवाओं को मजबूत बनाने की अपील मानते हैं, जबकि आलोचक इसे विभाजनकारी और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला बताते हैं। सवाल खुला है—क्या यह बयान राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा बनेगा या नई खाइयों को गहरा करेगा? समय ही जवाब देगा।





