बिहार के चुनावी अखाड़े में आज कांग्रेस ने ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा जिसने न सिर्फ बीजेपी और केंद्र सरकार की साख पर चोट की, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए। एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार चुनाव ऑब्जर्वर अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा दोनों ने खुलकर आरोप लगाया कि बिहार में 70,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की CAG रिपोर्ट और 62,000 करोड़ रुपये के घोटाले का BJP नेता RK सिंह द्वारा स्वयं किया गया खुलासा यह साबित करता है कि सत्ता खुद अपनी ही पोल खोल रही है, लेकिन चुनाव आयोग इस पूरे घोटाले पर सुनियोजित चुप्पी ओढ़े बैठा है। गहलोत ने जहां चुनावी नियमों को खुलेआम कुचले जाने का आरोप लगाया, वहीं खेड़ा ने केंद्र के मंत्रियों द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों को धमकियों से दबाने और मीडिया पर दबाव डालकर सच्चाई को मिटाने की कोशिशों का मामला देश के सामने रखा। दोनों नेताओं का स्पष्ट संदेश था—“बिहार में सिर्फ घोटाले नहीं हुए, लोकतंत्र की हत्या का षड्यंत्र चल रहा है।”
अशोक गहलोत ने इस संदर्भ में कहा कि चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है, और सरकारें जनता के हित में भी किसी नई स्कीम या लाभांश का ऐलान नहीं कर सकतीं। लेकिन इसके बावजूद, बिहार में महिलाओं के खातों में पैसा भेजकर वोट खरीदने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का चीरहरण है।
गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब चुनाव आते हैं तो वादों और योजनाओं की बरसात होती है, पर सत्ता में आते ही जनता के सपनों और वादों की कब्रगाह बना दी जाती है। उन्होंने याद दिलाया कि 15 लाख रुपये हर नागरिक को देने, 2 करोड़ रोजगार प्रत्येक वर्ष देने, स्मार्ट सिटी बनाने, और बंद चीनी मिलें शुरू कराने जैसे वादों का क्या हुआ? उन्होंने कहा—“क्या झूठ बोलना अब लोकतंत्र की पहचान बना दी गई है? क्या जनता को हर बार भ्रमित करना ही भाजपा की चुनावी नीति है?”
पवन खेड़ा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सत्ता पक्ष सिर्फ विकास की बातें करने के बजाय धमकी और दमन की भाषा में उतर चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह ने यह कहकर विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाया कि मतदान वाले दिन वे घर से बाहर न निकलें। यह वक्तव्य केवल अभद्रता नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के चेहरे पर काला धब्बा है। खेड़ा ने कहा कि “वे जानते हैं कि जनता के खिलाफ अपराध कर रहे हैं, इसलिए कानून से भी बचते फिर रहे हैं—क्योंकि सत्ता की ढाल उन्हें सुरक्षा देती है।”
सबसे बड़ा विस्फोटक आरोप उन्होंने यह लगाया कि जब BJP नेता और पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री R.K. सिंह ने खुद कहा कि “बिहार में 62,000 करोड़ का स्कैम हुआ है और CBI जांच होनी चाहिए,” तो आश्चर्यजनक ढंग से कुछ ही समय बाद मीडिया चैनलों ने उनके वीडियो प्रमाण डिलीट कर दिए। पवन खेड़ा ने इसे सच्चाई की हत्या बताते हुए कहा—“चोरी ऊपर से सीना-जो़री… और आज स्थिति यह कि जो सच्चाई बोले वही मीडिया की स्क्रीन से गायब कर दिया जाए! यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही की तैयारी है।”
गहलोत और खेड़ा दोनों ने स्पष्ट कहा कि बिहार की जनता अब यह तय करेगी कि सत्ता की ताकत चलेगी या जनता का हक और जनादेश। इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने का युद्ध है।
कांग्रेस का दावा है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट तेज हो चुकी है और जनता रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा और न्याय की राजनीति के लिए तैयार है। महागठबंधन की ओर से 25 लाख रुपये के मुफ्त हेल्थ बीमा जैसी ऐतिहासिक योजना ने गरीब और मध्यम वर्ग के मन में नई उम्मीद जगाई है। गहलोत ने कहा—“तेजस्वी यादव उभरते हुए नेता हैं और जनता उन्हें नई ऊर्जा और नए भविष्य की ओर ले जाने वाले नेतृत्व के रूप में देख रही है।”
अंत में पवन खेड़ा ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग अब भी निष्पक्ष भूमिका में नहीं आया, तो यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे काली गाथाओं में से एक दर्ज होगी। उन्होंने कहा—“यदि संस्थाएं बिक जाएं, मीडिया डर जाए और सत्ता धमकियों से जनादेश दबाने लगे—तो फिर लोकतंत्र बचेगा नहीं, सिर्फ चुनाव बचे रह जाएंगे। और चुनाव बिना लोकतंत्र के—सिर्फ तानाशाहों का उत्सव होते हैं।”




