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शेख हसीना

लोकतंत्र खतरे में, चरमपंथ हावी होने की आशंका: शेख हसीना

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एबीसी डेस्क 29 दिसंबर 2025

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने TV18 (News18) को दिए एक खास इंटरव्यू में अपने देश की मौजूदा स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बांग्लादेश आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ लोकतंत्र कमजोर पड़ता दिख रहा है और चरमपंथी ताकतें सिर उठा रही हैं। शेख हसीना का कहना है कि यह हालात सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर आम आदमी की ज़िंदगी, उसकी सुरक्षा और भविष्य पर भी पड़ रहा है।

इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि जिस बांग्लादेश को उन्होंने लोकतंत्र, विकास और सामाजिक सद्भाव के रास्ते पर आगे बढ़ाने की कोशिश की, वही देश आज अस्थिरता और डर के माहौल से गुजर रहा है। उनके अनुसार, कुछ ताकतें जानबूझकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही हैं, जिससे संविधान और कानून का सम्मान कम होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो बांग्लादेश एक ऐसे ढांचे की ओर बढ़ सकता है, जहाँ जनता की आवाज़ दबा दी जाए।

शेख हसीना ने चरमपंथ और उग्र विचारधाराओं को बांग्लादेश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ये ताकतें नफरत और डर के सहारे समाज को बांटने का काम कर रही हैं। इसका सीधा नुकसान आम लोगों को हो रहा है, जो शांति, रोज़गार और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं। हसीना के मुताबिक, लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब हर नागरिक खुद को सुरक्षित और सुना हुआ महसूस करे, लेकिन मौजूदा हालात में यह भावना कमजोर पड़ रही है।

भारत के साथ रिश्तों पर बात करते हुए शेख हसीना ने कहा कि भारत बांग्लादेश का पुराना और भरोसेमंद मित्र रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों और स्थिरता के पक्ष में हमेशा खड़ा रहेगा। उनका कहना था कि पड़ोसी देशों के बीच सहयोग और विश्वास न सिर्फ राजनीति के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि बांग्लादेश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी अहम भूमिका निभा सकता है।

इस इंटरव्यू में शेख हसीना का लहजा सिर्फ एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक चिंतित नागरिक और अनुभवी नेता का था। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोग डर के साथ नहीं, बल्कि उम्मीद और भरोसे के साथ जीना चाहते हैं। इसके लिए जरूरी है कि देश में निष्पक्ष राजनीति, स्वतंत्र चुनाव और कानून का राज कायम रहे। उन्होंने सभी से अपील की कि व्यक्तिगत या राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर देश के भविष्य के बारे में सोचा जाए।

TV18 को दिया गया शेख हसीना का यह इंटरव्यू एक चेतावनी और अपील दोनों है। चेतावनी इस बात की कि अगर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर किया गया, तो उसका खामियाजा पूरी जनता को भुगतना पड़ेगा; और अपील इस बात की कि बांग्लादेश को फिर से शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों के रास्ते पर लौटाया जाए, ताकि आम आदमी बिना डर के अपना भविष्य संवार सके।

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