नई दिल्ली 3 अक्टूबर 2025
दिल्ली सरकार अपनी नई आबकारी नीति 2025 का ड्राफ्ट लगभग अंतिम रूप दे चुकी है और यह अगले एक महीने के भीतर सामने आने की उम्मीद है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राजधानी में शराब की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार करना, साथ ही सरकार के राजस्व को बढ़ाना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ड्राफ्ट में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव है जो दिल्ली के शराब बाजार के परिदृश्य को बदल सकते हैं।
नई नीति के तहत, अब हर स्टोर पर प्रीमियम ब्रांड की शराब सुनिश्चित की जाएगी। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ता अब अपनी पसंद के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के महंगे और उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांड्स को आसानी से किसी भी लाइसेंस प्राप्त दुकान से खरीद सकेंगे। यह कदम खासकर उन उपभोक्ताओं को राहत देगा जो प्रीमियम व्हिस्की और अन्य स्पिरिट्स की तलाश में रहते हैं और जिन्हें अक्सर सीमित उपलब्धता का सामना करना पड़ता था। सरकार का मानना है कि प्रीमियम ब्रांड्स की बेहतर उपलब्धता से दिल्ली में पर्यटकों और उच्च आय वर्ग के लोगों के लिए खरीदारी का अनुभव बेहतर होगा और इससे राज्य के खजाने में भी अधिक इजाफा होगा।
नई शराब नीति के ड्राफ्ट में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बीयर पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र रहा है। हालांकि, लंबे विचार-विमर्श और एनसीआर के पड़ोसी शहरों (जैसे नोएडा, गुरुग्राम) में 21 साल की उम्र सीमा होने के बावजूद, दिल्ली में इसे कम करने के प्रस्ताव पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों के मुताबिक, बीयर पीने की न्यूनतम उम्र फिलहाल 25 साल ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस विषय पर विभिन्न हितधारकों से फीडबैक लिया था, जिसमें एक वर्ग ने उम्र घटाकर 21 साल करने का सुझाव दिया था ताकि युवा शराब खरीदने के लिए पड़ोसी राज्यों में न जाएं और राजस्व का नुकसान न हो।
हालांकि, सामाजिक पहलुओं और अन्य प्रशासनिक कारणों को ध्यान में रखते हुए, फिलहाल इस उम्र सीमा में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है। यह नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि दिल्ली के युवा अभी भी कानूनी तौर पर बीयर पीने के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर रहेंगे।
समग्र रूप से, दिल्ली की यह नई शराब नीति 2025 राजस्व वृद्धि और उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। सरकार अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने और आबकारी राजस्व के रिसाव को रोकने के लिए कई प्रशासनिक और प्रवर्तन संबंधी बदलाव भी लाने पर विचार कर रही है। ड्राफ्ट के अनुसार, अगले एक महीने में इस नीति को अंतिम रूप देकर सार्वजनिक किया जा सकता है, जिसके बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस नीति के लागू होने के बाद, न केवल प्रीमियम ब्रांड्स की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि यह भी उम्मीद की जा रही है कि शराब की दुकानों के संचालन और उनके माहौल में भी सुधार आएगा, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक खरीदारी का अनुभव मिल सके। दिल्ली सरकार का यह कदम राज्य की आबकारी व्यवस्था को एक नई दिशा देने का प्रयास है, जिसे पड़ोसी राज्यों की नीतियों के साथ तालमेल बिठाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।





