लेखक : महेंद्र सिंह
नई दिल्ली 1 अक्टूबर
क्यों ज़रूरी है साइक्लिंग?
आज का इंसान भागदौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि उसके पास खुद के स्वास्थ्य के लिए समय ही नहीं बचता। काम का दबाव, तकनीक पर निर्भरता और तेज़ रफ्तार जीवनशैली ने शारीरिक गतिविधि को लगभग ख़त्म कर दिया है। यही वजह है कि मोटापा, डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियाँ और तनाव जैसी समस्याएँ अब सामान्य हो चुकी हैं। ऐसे समय में ज़रूरत है एक ऐसी एक्टिविटी की जो न केवल सरल और सस्ती हो, बल्कि आनंददायक भी हो। मेरी नज़र में साइक्लिंग इस आवश्यकता को पूरा करने का सबसे अच्छा उपाय है। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है—जो स्वास्थ्य, मानसिक शांति और पर्यावरण, तीनों के लिए वरदान है।
दिल और शरीर के लिए फायदेमंद
साइक्लिंग को “कार्डियो वर्कआउट” का सबसे सरल रूप माना जाता है। जब हम साइकिल चलाते हैं, तो दिल की धड़कन बढ़ती है, ब्लड सर्कुलेशन तेज़ होता है और पूरे शरीर की मांसपेशियाँ सक्रिय हो जाती हैं। शोध बताते हैं कि नियमित रूप से सप्ताह में कम से कम 150 मिनट साइक्लिंग करने से हार्ट अटैक का खतरा 30% तक कम हो सकता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग रोज़ाना साइकिल से ऑफिस जाते हैं, उनमें दिल और कैंसर से मरने की संभावना उन लोगों की तुलना में आधी होती है जो गाड़ी से जाते हैं।
वजन घटाने और फिटनेस का रहस्य
आजकल वजन घटाना करोड़ों लोगों की सबसे बड़ी चिंता है। महंगी डाइटिंग और जिम की फीस हर किसी की जेब में फिट नहीं बैठती। साइक्लिंग इस समस्या का सबसे आसान और किफ़ायती समाधान है। सिर्फ़ एक घंटे की साइक्लिंग से 400 से 600 कैलोरी तक बर्न हो सकती हैं। लगातार 3 महीने साइक्लिंग करने वाले लोग औसतन 4 से 5 किलो वजन कम कर लेते हैं। खास बात यह है कि साइक्लिंग “लो-इम्पैक्ट” एक्सरसाइज है, यानी यह घुटनों और जोड़ों पर दबाव नहीं डालती। यही वजह है कि इसे हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है।
मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति
साइक्लिंग केवल शरीर को ही नहीं, दिमाग को भी स्वस्थ बनाती है। जब आप पैडल मारते हैं और खुले आसमान के नीचे हवा चेहरे से टकराती है, तो शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे “हैप्पी हार्मोन” निकलते हैं। ये तनाव कम करते हैं और मूड को पॉज़िटिव बनाते हैं। यही कारण है कि जो लोग नियमित साइक्लिंग करते हैं, वे डिप्रेशन और चिंता जैसी समस्याओं से दूर रहते हैं। 2020 में अमेरिका में हुए एक सर्वे के अनुसार, साइक्लिंग करने वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य बेहतर पाया गया और उनका आत्मविश्वास भी दूसरों से कहीं अधिक था।
मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती
साइक्लिंग पैरों, जांघों, कूल्हों और पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाती है। साथ ही यह हड्डियों की घनत्व बढ़ाकर ऑस्टियोपोरोसिस से बचाती है। जो लोग बचपन से साइक्लिंग की आदत डालते हैं, उनके हड्डियाँ ज़्यादा मज़बूत होती हैं और उम्र बढ़ने के बाद भी वे लचीले बने रहते हैं। यही वजह है कि कई डॉक्टर बुज़ुर्गों को भी हल्की साइक्लिंग की सलाह देते हैं।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद
साइक्लिंग का एक बड़ा फायदा यह है कि यह न केवल आपकी सेहत बल्कि पर्यावरण के लिए भी वरदान है। साइकिल चलाने से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है। नीदरलैंड्स और डेनमार्क जैसे देशों ने साइक्लिंग को अपनी संस्कृति का हिस्सा बना लिया है। वहाँ 60% लोग रोज़मर्रा के कामों के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। भारत जैसे देश में अगर लोग 5–10 किलोमीटर की दूरी के लिए साइकिल का इस्तेमाल करें, तो पेट्रोल-डीज़ल की खपत लाखों लीटर कम हो सकती है और प्रदूषण भी घटेगा।
रोचक तथ्य
नीदरलैंड्स में औसतन हर व्यक्ति साल में 1000 किलोमीटर से ज्यादा साइकिल चलाता है।
दुनिया की सबसे ज्यादा साइकिलें चीन में हैं—लगभग 50 करोड़।
WHO की रिपोर्ट कहती है कि अगर हर व्यक्ति सप्ताह में 150 मिनट साइक्लिंग करे तो मोटापे और डायबिटीज़ के मामलों में 25% की कमी आ सकती है।
भारत में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान साइकिल की बिक्री में 200% तक की बढ़ोतरी हुई, क्योंकि लोग इसे फिटनेस का सबसे आसान तरीका मानने लगे।
सेलिब्रिटीज़ और साइक्लिंग
सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी साइक्लिंग को अपनी फिटनेस का राज़ मानते हैं।
- अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार समय-समय पर सोशल मीडिया पर साइक्लिंग की तस्वीरें शेयर करते रहे हैं।7
- सलमान खान तो साइक्लिंग के लिए मशहूर हैं और अक्सर मुंबई की सड़कों पर 20–25 किलोमीटर तक पैडल मारते नज़र आते हैं।
- हॉलीवुड में मैट डेमन, लियोनार्डो डिकैप्रियो और आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर साइक्लिंग के शौकीन हैं।
- विराट कोहली और एम.एस. धोनी जैसे भारतीय क्रिकेटर्स भी फिटनेस के लिए साइक्लिंग का इस्तेमाल करते हैं।
- ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और कई यूरोपीय नेता रोज़ ऑफिस साइकिल से
- भारत में लेबर, स्पोर्ट्स एवं यूथ अफेयर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया अक्सर साइकिल से संसद जाते हुए देखे गए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी रोजाना साइक्लिंग करते हुए पाए गए हैं
ये उदाहरण बताते हैं कि साइक्लिंग न केवल फिटनेस बल्कि एक लाइफस्टाइल चॉइस भी है।
कितनी देर साइक्लिंग करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप फिट रहना चाहते हैं तो रोज़ाना 30 मिनट साइक्लिंग पर्याप्त है। अगर वजन घटाना चाहते हैं तो सप्ताह में 5 दिन 45–60 मिनट की साइक्लिंग बेहद प्रभावी है। शुरुआती लोग 10–15 मिनट से शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे समय और दूरी बढ़ा सकते हैं।
बच्चों और महिलाओं के लिए साइक्लिंग
बच्चों में मोटापा और स्क्रीन टाइम की बढ़ती समस्या को देखते हुए साइक्लिंग उनके लिए एक बेहतरीन गतिविधि है। यह उन्हें मोबाइल और टीवी से दूर रखती है और बाहर खेलने के लिए प्रेरित करती है। वहीं, महिलाओं के लिए भी यह एक सुरक्षित और प्रभावी व्यायाम है। गर्भावस्था के बाद फिटनेस पाने और हड्डियों की मजबूती के लिए यह बेहद उपयोगी है।
साइक्लिंग आज केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली का ज़रूरी हिस्सा बन चुकी है। यह हमारे दिल और दिमाग को स्वस्थ रखती है, मांसपेशियों और हड्डियों को मज़बूत बनाती है, तनाव कम करती है और पर्यावरण को भी सुरक्षित बनाती है। यह जेब पर भारी नहीं पड़ती और हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी है। मेरा मानना है कि अगर भारत जैसे देश में साइक्लिंग को रोज़मर्रा के जीवन में शामिल किया जाए, तो यह हमारी सेहत, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तीनों के लिए क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।




