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जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का आरोप: तीनों बोली लगाने वाली कंपनियों में बालकृष्णन शेयर होल्डर

देहरादून, 12 सितंबर 2025

उत्तराखंड की धामी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट डेवलपमेंट पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ताज़ा खुलासे में सामने आया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने वाली तीनों कंपनियों में एक ही व्यक्ति, बालकृष्णन, शेयर होल्डर हैं। हैरानी की बात यह है कि इन्हीं कंपनियों में से एक को टेंडर भी मिल गया।

मामला क्या है?

मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया चलाई थी। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई, लेकिन बाद में जांच में पाया गया कि सभी तीनों कंपनियों के शेयरधारकों की सूची में बालकृष्णन का नाम मौजूद है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रतिस्पर्धा महज़ औपचारिक रही और वास्तविकता में पूरा खेल एक ही व्यक्ति के इशारे पर हुआ।

विपक्ष का हमला

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने धामी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनका आरोप है कि “सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को पारदर्शी बताकर जनता को गुमराह किया गया, जबकि हकीकत यह है कि टेंडर प्रक्रिया पहले से तयशुदा थी।” विपक्ष ने इस पूरे मामले की CBI या हाई कोर्ट मॉनिटरड जांच की मांग की है।

सरकार की सफाई

सरकारी सूत्रों ने फिलहाल किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत की गई है। हालांकि विपक्ष के लगातार दबाव के चलते अब सरकार पर सफाई देने और जांच कराने का दबाव बढ़ गया है।

पर्यटन महत्व वाला प्रोजेक्ट

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए यह प्रोजेक्ट धामी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से न केवल रोजगार सृजित होगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। लेकिन भ्रष्टाचार के इन आरोपों ने अब इस महत्वाकांक्षी योजना पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

आगे क्या?

अब देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले की स्वतंत्र जांच कराती है या विपक्षी दबाव को टालने के लिए औपचारिक बयान तक ही सीमित रहती है। लेकिन इतना तय है कि जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट प्रोजेक्ट पर उठे सवालों ने धामी सरकार की छवि को बड़ा झटका दिया है।

 

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