महेंद्र कुमार | नई दिल्ली | 28 दिसंबर 2025
धर्म व नफरत से दूर : सत्ता नहीं, संविधान और इंसान पहले, कांग्रेस न झुकी है, न झुकेगी — खड़गे
कांग्रेस स्थापना दिवस के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भावनात्मक लेकिन दृढ़ शब्दों में कहा कि भारतीय राजनीति में जब-जब यह प्रचार किया गया कि “कांग्रेस खत्म हो चुकी है”, तब-तब कांग्रेस ने सत्ता की गिनती से नहीं, बल्कि अपने मूल्यों और सिद्धांतों की ताक़त से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि आज भले ही कांग्रेस के पास सत्ता कम हो, लेकिन उसकी वैचारिक रीढ़ आज भी उतनी ही सीधी और मज़बूत है, जितनी आज़ादी की लड़ाई के दौर में थी। खड़गे ने साफ किया कि कांग्रेस के लिए सत्ता कभी अंतिम लक्ष्य नहीं रही, बल्कि वह हमेशा संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना और आम आदमी के अधिकारों की आवाज़ बनने का माध्यम रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगे और न ही मंदिर–मस्जिद के नाम पर नफरत फैलाने की राजनीति की। कांग्रेस ने धर्म को इंसान की निजी आस्था माना, सत्ता का हथियार नहीं बनाया। इसके उलट आज की राजनीति में डर, नफरत और ध्रुवीकरण को रणनीति बना लिया गया है, जहां समाज को जोड़ने के बजाय बांटने की कोशिशें हो रही हैं—और यही वह रास्ता है, जिसके खिलाफ कांग्रेस मजबूती से खड़ी है। खड़गे ने कहा बीजेपी समाज को तोड़ती है जबकि कांग्रेस देश को जोड़ती है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश आज जिस दौर से गुजर रहा है, वहां सवाल केवल सरकार बदलने का नहीं, बल्कि सच को बचाने का है। सत्ता आज भाजपा के पास हो सकती है, लेकिन सच उसके पास नहीं है। यही वजह है कि कभी आंकड़े छिपाए जाते हैं, कभी जनगणना को टाल दिया जाता है और कभी संविधान बदलने जैसी बातें उछाली जाती हैं। खड़गे ने चेतावनी दी कि जब किसी सत्ता को सच से डर लगने लगे, तब लोकतंत्र सबसे पहले खतरे में आता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कोई साधारण राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक जीवंत विचारधारा है—और विचारधाराएं कभी मरती नहीं हैं। 140 वर्षों के इतिहास में कांग्रेस ने सत्ता के शिखर भी देखे हैं और विपक्ष में रहकर कठिन संघर्ष भी, लेकिन उसने अपने मूल मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। दादाभाई नौरोजी से लेकर महात्मा गांधी, सरोजिनी नायडू, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक—कांग्रेस के पास उन नेताओं की विरासत है जिन्होंने सत्ता से पहले देश, लोकतंत्र और जनता को प्राथमिकता दी।
खड़गे ने कहा कि आज़ादी के बाद भी कांग्रेस ने लोकतंत्र को केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जीवंत विचार के रूप में मजबूत किया। हरित क्रांति से लेकर संचार और सूचना क्रांति तक, अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम से लेकर आर्थिक उदारीकरण तक—भारत की वैश्विक पहचान गढ़ने में कांग्रेस की भूमिका ऐतिहासिक रही है। यूपीए शासनकाल में आरटीआई, आरटीई, मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून और वनाधिकार कानून जैसे अधिकार आधारित कानूनों ने आम आदमी को आवाज़, सम्मान और आत्मविश्वास दिया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में मोदी सरकार ने इन्हीं संस्थाओं, कानूनों और जनहितकारी अधिकारों को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास किया है। मनरेगा को खत्म करने की कोशिशें, जल-जंगल-जमीन की लूट, चंद पूंजीपतियों के हित में कानूनों में बदलाव और फर्जी आंकड़ों के सहारे सच्चाई छिपाने की राजनीति—ये सभी संकेत हैं कि लोकतंत्र को भीतर से खोखला किया जा रहा है।
खड़गे ने कहा कि आज जो लोग इतिहास पर भाषण दे रहे हैं, कांग्रेस यह याद दिलाती है कि उनके वैचारिक पूर्वज आज़ादी के आंदोलन से दूर खड़े थे। कांग्रेस ने ही इस देश को संविधान दिया, तिरंगा दिया और लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी। इसलिए कांग्रेस आज भी स्पष्ट शब्दों में कहती है—हम सत्ता में रहें या न रहें, लेकिन संविधान और जनता के साथ किसी भी तरह की सौदेबाज़ी नहीं करेंगे।
अंत में खड़गे ने कहा कि कांग्रेस का संदेश बिल्कुल साफ है: यह लड़ाई कुर्सी की नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और भारत की आत्मा को बचाने की लड़ाई है। महात्मा गांधी के शब्दों को दोहराते हुए उन्होंने कहा—
“सत्य तब भी टिकता है, जब उसके पक्ष में बहुमत न हो।”
कांग्रेस का विश्वास है कि उसके पास आज भी सत्य है—और धीरे-धीरे, लेकिन मजबूती से, जनता का समर्थन भी।कांग्रेस न कभी झुकी थी — न कभी झुकेगी। क्योंकि कांग्रेस सत्ता की नहीं, विचार और संविधान की राजनीति करती है।




