नई दिल्ली, 22 अक्टूबर
कांग्रेस पार्टी ने गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर बेहद कड़ा और भावनात्मक हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने धर्म और किसानों के मुद्दे को जोड़ते हुए एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के दिन, जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर अपने गौपालकों और किसानों को देवराज इंद्र के भयंकर प्रकोप और अतिवृष्टि से बचाया था, उसी दिन खुद को हिंदुओं की सबसे बड़ी रक्षक और धर्मध्वज वाहक बताने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार ने देश के किसानों को भयंकर बाढ़, फसल हानि और आर्थिक तबाही के बीच भगवान भरोसे छोड़ दिया है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि बीजेपी की कथनी और करनी में भारी अंतर है, जिससे स्पष्ट होता है कि धर्म का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविक ज़रूरतमंदों को त्याग दिया गया है।
पवन खेड़ा ने बीजेपी के इस आचरण को ‘विडंबना नहीं, बल्कि पाखंड’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बड़े-बड़े मंचों से किसानों की रक्षा और उनके हितों की बात करती है, लेकिन जब महाराष्ट्र के किसान भीषण बाढ़ की चपेट में आए, उनके खेत बह गए, मवेशी डूब गए, और गाँव-के-गाँव तबाह हो गए—तब सरकार की सारी मदद सिर्फ़ कागजी वादों और हवाई भाषणों तक ही सीमित रह गई। उन्होंने इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया कि देश का पेट भरने के लिए जो किसान दिन-रात खून-पसीना बहाता है, उसी अन्नदाता को आज उसकी अपनी ही सरकार ने इस आपदा की घड़ी में बेसहारा और लाचार छोड़ दिया है।
खेड़ा ने सीधे-सीधे भाजपा पर तंज कसते हुए एक अत्यंत विवादास्पद बयान दिया: “हिंदू को ख़तरा है… बीजेपी से! क्योंकि यह सरकार केवल धर्म के नाम पर वोट मांगती है और भावनात्मक राजनीति करती है, मगर जब ‘असली हिंदू’ – यानी देश का किसान – मुसीबत में होता है, तो सत्ताधारी पार्टी उससे आँखें फेर लेती है और उसकी सहायता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती।”
कांग्रेस प्रवक्ता का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में किसान भारी असंतोष और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये किसान राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए ₹32,000 करोड़ के कथित बाढ़ राहत पैकेज की असफलता को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों का स्पष्ट आरोप है कि राज्य सरकार ने बाढ़ के बाद बड़े-बड़े वादे तो किए, लेकिन घोषित किया गया मुआवज़ा आज तक भी ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुँचा है।
राहत पैकेज की ज़मीनी हकीकत और सरकारी वादों के बीच की इस खाई ने किसानों में भारी निराशा और आक्रोश पैदा कर दिया है। कांग्रेस ने इस स्थिति को “गोवर्धन पूजा की सबसे बड़ी विडंबना” बताते हुए कहा है कि जहां द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति के प्रकोप से अपने किसानों की रक्षा की थी और उन्हें अभयदान दिया था, वहीं आज की बीजेपी और महायुति सरकार किसानों को अपनी सत्ता के कहर के नीचे दबा रही है और उन्हें उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
पवन खेड़ा ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए मोदी सरकार को सीधे-सीधे चुनौती दी और एक मार्मिक सवाल पूछा: “अगर आज किसानों की मदद के लिए कोई गोवर्धन पर्वत उठाने वाला नहीं है, तो जनता कितने गोवर्धन उठाएगी, जब सत्ता ने ही किसानों को लाचार और असहाय छोड़ दिया है?” इस बयान के माध्यम से कांग्रेस ने न केवल बीजेपी पर धर्म के पाखंड का आरोप लगाया है, बल्कि किसानों के मुद्दे को हिंदू धर्म के भावनात्मक पर्व गोवर्धन पूजा से जोड़कर एक शक्तिशाली नैरेटिव बनाने की कोशिश की है, ताकि यह दिखाया जा सके कि भाजपा की प्राथमिकताएं चुनावी लाभ हैं, न कि देश के अन्नदाताओं का वास्तविक कल्याण।




