राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
संसद मार्च के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को CJP के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात कर संगठन की मांगों पर चर्चा की। हालांकि बैठक के बाद किसी मांग पर तत्काल सहमति नहीं बनी और आंदोलन जारी रखने की घोषणा की गई।
CJP के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को एक लिखित ज्ञापन सौंपा, जिसमें तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या पद से हटाया जाना, तथा NEET से जुड़े कथित आत्महत्या मामलों के प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है।
बैठक के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि मंत्री ने मांगों पर सरकार के भीतर चर्चा करने का आश्वासन दिया है। वहीं प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जेपी नड्डा ने पार्टी नेतृत्व से विचार-विमर्श के लिए कुछ और समय मांगा है। सरकार की ओर से बैठक के बाद इन मांगों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई।
CJP का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। संगठन लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहा है।
उधर, हजारों प्रदर्शनकारियों ने ‘चलो संसद’ मार्च के तहत संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने के आरोप लगाए, जबकि पुलिस ने राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की।
इस बीच CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। संगठन के अनुसार, उन्होंने यह फैसला सोनम वांगचुक के अनुरोध पर लिया ताकि वे आंदोलन का नेतृत्व कर सकें। वहीं सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन से उन्हें छुट्टी देने की अपील की। उनका कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है और वे आंदोलन में शामिल होकर संसद मार्च का हिस्सा बनना चाहते हैं।
सरकार और CJP के बीच यह पहली औपचारिक वार्ता ऐसे समय हुई है, जब छात्र आंदोलन और NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में भी प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। फिलहाल बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।




