अंतरराष्ट्रीय | रवि प्रकाश | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/बीजिंग | 14 मई 2026
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले चीनी स्वामित्व वाले जहाजों को विशेष “मैनेजमेंट प्रोटोकॉल” के तहत आवाजाही की अनुमति देकर दुनिया को बड़ा रणनीतिक संकेत दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बीजिंग में उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में शामिल हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि दर्जनों जहाज, जिनमें कई चीनी जहाज भी शामिल हैं, ईरान की निगरानी व्यवस्था के तहत सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल पर “विस्तारवाद और युद्ध भड़काने” का आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता किसी के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि “मिडिल ईस्ट में अस्थिरता सभी पक्षों के लिए नुकसानदायक है, यहां तक कि उन देशों के लिए भी जो संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं।” अराघची ने BRICS देशों से अमेरिका और इजरायल की कथित आक्रामक नीतियों की निंदा करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि “पश्चिम की झूठी श्रेष्ठता की भावना को ग्लोबल साउथ देशों को मिलकर चुनौती देनी होगी।”
इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने दावा किया कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया अमेरिकी नौसैनिक दबाव और आर्थिक प्रतिबंध “बेहद सफल” साबित हो रहे हैं। CNBC को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान की आर्थिक स्थिति तेजी से कमजोर हो रही है और उसकी सैन्य क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि वह दबाव के बावजूद अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करता रहेगा।
बीजिंग में चल रही ट्रंप-शी वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा सबसे संवेदनशील विषयों में शामिल रहा। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर प्रभाव डालकर वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य बनाने में मदद करे। दूसरी ओर चीन सार्वजनिक रूप से कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता की बात कर रहा है। जानकारों का मानना है कि चीन, ईरान और अमेरिका के बीच यह त्रिकोणीय तनाव आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
उधर पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले जारी हैं और Hezbollah ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। लेबनान और इजरायल के प्रतिनिधिमंडलों के बीच वॉशिंगटन में नई वार्ता शुरू हुई है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच फिलिस्तीनी राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने कहा कि जब तक फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान नहीं होगा, तब तक पश्चिम एशिया में स्थायी शांति संभव नहीं है।
BRICS बैठक को लेकर भी नए विवाद उभरते दिख रहे हैं। ईरान और UAE के बीच बढ़ते तनाव के कारण नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन के साझा घोषणापत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं। ईरान के उपविदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने संकेत दिया कि कुछ सदस्य देशों के रुख की वजह से अंतिम संयुक्त बयान जारी करना मुश्किल हो सकता है। इससे साफ है कि ईरान युद्ध और होर्मुज संकट अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति और शक्ति संतुलन का बड़ा केंद्र बन चुका है।




