प्रमोद प्रवीण | रायपुर 2 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में राज्य की राजनीति से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत दे दी है। कोर्ट के इस फैसले से चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है, वहीं यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। चैतन्य बघेल का नाम राज्य में हुए कथित शराब घोटाले की जांच के दौरान सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में लंबे समय से जांच कर रही हैं। आरोप है कि शराब कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क के ज़रिये सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया और अवैध कमाई की गई। हालांकि चैतन्य बघेल की ओर से इन आरोपों को लगातार राजनीति से प्रेरित बताया जाता रहा है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि चैतन्य बघेल जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभी साबित किया जाना बाकी है। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देना सही समझा।
कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में इसे न्याय की जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि विपक्ष इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहा है। राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है। समर्थकों का कहना है कि कानून ने अपना काम किया है और जांच अभी जारी है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि घोटाले की निष्पक्ष जांच ज़रूरी है।
फिलहाल, हाईकोर्ट से मिली जमानत ने चैतन्य बघेल को कानूनी राहत तो दी है, लेकिन शराब घोटाला मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की सुनवाई यह तय करेगी कि इस मामले में सच क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।




