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दुनियाभर में प्रकाश पर्व की धूम: गुरु नानक जयंती पर श्रद्धा और सेवा का संगम

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अमनप्रीत  | नई दिल्ली 5 नवंबर 2025

आज का दिन पूरी दुनिया के लिए आध्यात्मिक आनंद से भरा है। गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है, श्रद्धा, प्रेम और भाईचारे के माहौल में वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है। भारत से लेकर कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई और खाड़ी देशों तक जहाँ-जहाँ सिख समुदाय रहता है, वहाँ गुरुद्वारों में सिमरन, कीर्तन और सेवा की गूँज सुनाई दे रही है। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि 15वीं सदी में जन्मे गुरु नानक देव जी की दी हुई शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रकाशमान हैं जितनी तब थीं — और ये teachings पूरी मानवता को जोड़ने की ताकत रखती हैं।

अमृतसर का स्वर्ण मंदिर आज दीपों की जगमगाहट से स्वर्ग जैसा प्रतीत हो रहा है। हजारों श्रद्धालुओं की संगत, शांत सरोवर में प्रतिबिंबित प्रकाश और गुरु वाणी की दिव्यता — हर मन को गुरु की कृपा से भर रही है। दुनिया भर के गुरुद्वारों में अखंड पाठ, कीर्तन दरबार, और नगर कीर्तन का आयोजन किया गया है। विदेशों में बसे भारतीयों ने भी सिख परंपरा और भारतीय संस्कृति की इस विरासत को शानदार रूप दिया है। लंदन के साउथहॉल, कनाडा के ब्रैम्पटन, अमेरिका के फ़्रेमोंट वर्जीनिया और मेलबर्न के गुरुद्वारों में भारी भीड़ उमड़ी है। वहीं लंगर में सभी धर्मों, नस्लों और देशों के लोग एकसाथ बैठकर भोजन ग्रहण कर रहे हैं — यही वह संदेश है जो गुरु नानक देव जी ने सदैव दिया — सब एक हैं, सब समान हैं।

गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन से यह साबित किया कि असली धर्म इंसानियत है। उन्होंने जाति-पांत, ऊँच-नीच और धार्मिक भेदों को चुनौती देते हुए कहा —

“एक ओंकार सतनाम”

अर्थात ईश्वर एक ही है और उसकी नज़र में सब बराबर हैं।

उनकी वाणी का सार तीन सिद्धांतों में निहित है —

नाम जपो, किरत करो और वंड छको।

यानी ईश्वर को स्मरण करो, ईमानदारी से अपनी आजीविका कमाओ और जो मिला है उसे दूसरों के साथ साझा करो। यदि मानव समाज इन तीन शिक्षाओं को जीवन में उतार ले, तो दुनिया निश्चित रूप से संघर्ष और स्वार्थ से दूर, शांति और प्रेम से भर सकती है।

गुरु नानक देव जी ने चार उदासियों के माध्यम से पूरी दुनिया का भ्रमण कर यह संदेश फैलाया कि कोई भी मनुष्य छोटा नहीं है और कोई भी स्त्री-पुरुष कमजोर नहीं है। उन्होंने स्त्री शक्ति की महत्ता को दुनिया के सामने रखते हुए कहा —

“सो क्यों मंदा आखिए — जित जन्मे राजान”

यह वह संदेश है जो आज के युग में महिला सशक्तिकरण का आधार बनकर खड़ा है।

आज जब दुनिया के कई कोनों में युद्ध, जातीय तनाव और वैचारिक विभाजन देखने को मिलते हैं, गुरु नानक देव जी की सीख हमें याद दिलाती है कि करुणा, सत्य और समाजहित ही एक बेहतर भविष्य की राह है। उनका मानवतावादी दर्शन —

“सब में जोत जोत है सोए”

— यह सिखाता है कि हर प्राणी में परमात्मा का ही प्रकाश है, इसलिए किसी के साथ भेदभाव करना, ईश्वर की ही अवमानना है।

आज कई देशों में ऐतिहासिक इमारतों को रोशनी से सजाया गया है, सोशल मीडिया पर #PrakashParv और #GuruNanakJayanti ट्रेंड कर रहे हैं और विश्वभर की सरकारें इस पवित्र अवसर पर शुभकामनाएँ दे रही हैं। यह स्पष्ट है कि गुरु नानक देव जी का प्रकाश सीमाओं से परे है — उनका संदेश पूरी दुनिया को जोड़ता है, बाँटता नहीं।

प्रकाश पर्व हमें सिखाता है: सच और न्याय की राह चलो, मेहनत से कमाओ और बाँटकर खाओ, हर मनुष्य में परमात्मा के प्रकाश को पहचानो और मानवता सबसे बड़ा धर्म है। गुरु नानक देव जी के विचार आज भी दुनिया को नैतिकता, समानता और प्रेम की राह दिखाते हैं। उनका जीवन स्वयं एक दीप है —जो अँधेरे को चुनौती देता है और रोशनी का मार्ग बनाता है। गुरु नानक जयंती की पूरे विश्व को हार्दिक शुभकामनाएँ! वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतह!

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