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सीजफायर फिर संकट में: अमेरिका-ईरान के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले

अंतरराष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन/तेहरान | 7 जून 2026

अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम (सीजफायर) एक बार फिर गंभीर परीक्षा से गुजर रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए हमले किए हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की आशंका फिर से गहरा गई है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में भेजे गए चार आत्मघाती ड्रोन मार गिराए गए। अमेरिका का दावा है कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा थे। इसके बाद अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए।

ईरान ने भी तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी एयरबेस और नौसैनिक सुविधाओं पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि अमेरिकी सेना का कहना है कि दागी गई सात मिसाइलों में से छह को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया और एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।

यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अप्रैल से लागू युद्धविराम पहले ही दबाव में है। हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच कई बार सैन्य टकराव हो चुके हैं। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाल ही में हुए ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत और 60 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने भी तनाव को बढ़ा दिया था।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि अमेरिकी तेल टैंकर और ईरानी क्षेत्रों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। वहीं अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता को जानबूझकर नुकसान पहुंचा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में फिर से भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

इस बीच दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही वार्ताएं भी ठप पड़ती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर समझौते की शर्तें बदलने और नए दबाव बनाने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें फिलहाल कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।

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