अवधेश कुमार | नई दिल्ली | 13 जनवरी 2026
क्या है Mandatory Public Disclosure और क्यों जरूरी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के अपने सभी संबद्ध स्कूलों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर Mandatory Public Disclosure (MPD) यानी अनिवार्य सार्वजनिक जानकारी अपलोड नहीं की, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। CBSE का कहना है कि यह निर्देश कोई नया नहीं है, बल्कि पहले से लागू नियमों का ही सख्ती से पालन कराने की कोशिश है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही, टालमटोल या आधी-अधूरी जानकारी को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।Mandatory Public Disclosure का मतलब है कि स्कूल अपनी पूरी बुनियादी और प्रशासनिक जानकारी सार्वजनिक करें, ताकि अभिभावक, विद्यार्थी और आम लोग आसानी से जान सकें कि स्कूल किस तरह काम कर रहा है। इसमें स्कूल की मान्यता से जुड़े दस्तावेज, फीस का पूरा विवरण, शिक्षकों की योग्यता, छात्र-शिक्षक अनुपात, इंफ्रास्ट्रक्चर, कक्षाओं की संख्या, प्रयोगशालाएं, सुरक्षा मानक और संपर्क विवरण जैसी अहम जानकारियां शामिल होती हैं। CBSE का मानना है कि जब यह सारी जानकारी वेबसाइट पर खुले तौर पर उपलब्ध होगी, तो पारदर्शिता बढ़ेगी और स्कूलों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।
क्यों सख्त हुआ CBSE का रुख
CBSE को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्कूल या तो अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी डालते ही नहीं हैं, या फिर अधूरी और पुरानी जानकारी अपलोड कर देते हैं। इससे अभिभावकों को सही जानकारी नहीं मिल पाती और कई बार फीस, सुविधाओं और नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है। बोर्ड का कहना है कि शिक्षा एक सेवा है, कोई छिपा हुआ कारोबार नहीं, इसलिए इससे जुड़ी हर जरूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसी सोच के तहत अब CBSE ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
नियम नहीं माने तो क्या होगी कार्रवाई
CBSE ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल तय समय में Mandatory Public Disclosure नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नोटिस, जुर्माना, मान्यता पर रोक या यहां तक कि संबद्धता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। बोर्ड ने स्कूल प्रबंधन को यह भी याद दिलाया है कि वेबसाइट पर दी गई जानकारी सही, अपडेटेड और आसानी से देखने योग्य होनी चाहिए। सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए पीडीएफ डाल देना या लिंक छिपा देना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
अभिभावकों और छात्रों के लिए राहत की बात
CBSE का यह कदम अभिभावकों और छात्रों के हित में माना जा रहा है। इससे उन्हें स्कूल चुनने से पहले फीस, सुविधाओं और शिक्षकों से जुड़ी सही और साफ जानकारी मिल सकेगी। साथ ही, अगर कोई स्कूल नियमों के खिलाफ काम करता है, तो उसकी पहचान करना भी आसान होगा। कुल मिलाकर, CBSE का यह निर्देश शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है।




