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धर्मशाला और मैकलोडगंज: एक यात्रा जहां प्रकृति, संस्कृति और शांति साथ चलते हैं

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में बसे धर्मशाला और मैकलोडगंज महज हिल स्टेशन नहीं हैं — ये वो स्थल हैं जहाँ हिमालय की नीरवता, तिब्बती संस्कृति की जीवंतता और जीवन के गूढ़ प्रश्नों की गूँज एक साथ सुनाई देती है। धर्मशाला अपने ऊँचे देवदार वृक्षों, बादलों से बातें करते घरों और खुले आसमान के साथ

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मसूरी: पहाड़ों की रानी — एक यात्रा, जो आँखों से नहीं, दिल से देखी जाती है

मसूरी… एक नाम जो सुनते ही दिल की परतों में कुछ पुराना और प्यारा सा जाग जाता है। वह बचपन की कहानी जिसमें कोई हिल स्टेशन होता था, धुंध में लिपटी पगडंडियाँ होती थीं, और दूर घाटियों में बादल तैरते दिखते थे — मसूरी वही हक़ीक़त है जो कल्पनाओं के क़रीब है। उत्तराखंड की यह

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नैनीताल – तालों का शहर: प्रकृति की गोद में बसा एक जीवंत स्वप्न

 उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों में बसा नैनीताल, महज एक हिल स्टेशन नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवंत अनुभव है जो समय के साथ और गहरा होता जाता है। इस शहर का नाम सुनते ही आँखों के सामने एक नीला झील तैरता है, जिसमें बोटें बह रही हैं, किनारे बसी लकड़ी की छतों वाली दुकानें हैं, और

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लोलाब वैली: कश्मीर की हरी चादर में लिपटी एक शांत, रहस्यमय और आत्मीय घाटी

जहाँ हरियाली कविता बनकर बहती है कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में स्थित लोलाब घाटी एक ऐसी जगह है जहाँ प्रकृति ने अपने सबसे कोमल रंगों से धरती को सजाया है। श्रीनगर से लगभग 115 किलोमीटर दूर स्थित यह घाटी, अपने हरे-भरे बागों, शांत झीलों, ऊँचे देवदारों और कलकल बहती नदियों के लिए जानी जाती है।

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लेह-लद्दाख: जहां हर मोड़ आत्मा को छू जाता है

लेह-लद्दाख — एक ऐसा नाम जो सुनते ही आँखों में बर्फीली चोटियाँ, खुले आसमान, रंगीन प्रार्थना झंडे और ख़ामोश लेकिन विशाल पहाड़ी सन्नाटा तैर जाता है। यह भारत का वह हिस्सा है जो शहरी भीड़, भागदौड़ और भाग्य की आकांक्षाओं से कोसों दूर है। लेकिन जब कोई पर्यटक पहली बार लद्दाख की धरती पर उतरता

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गुरेज़ वैली: हिमालय की छांव में छिपा कश्मीर का रहस्यमय रत्न

गुरेज़ – जन्नत का छुपा हुआ टुकड़ा गुरेज़ घाटी, जम्मू-कश्मीर की उत्तर दिशा में स्थित एक अद्भुत, रहस्यमय और अत्यंत शांत स्थल है, जो श्रीनगर से लगभग 125 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से लगभग 8,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह स्थान भारतीय उपमहाद्वीप की उन चुनिंदा घाटियों में से है, जहाँ आज

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केदारनाथ, बद्रीनाथ और उत्तराखंड: एक तीर्थ नहीं, आत्मा की यात्रा

उत्तराखंड की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा हुआ केदारनाथ और बद्रीनाथ, भारतीय तीर्थयात्रा की परंपरा का वह केंद्र है जहाँ केवल देवताओं की उपासना नहीं होती, बल्कि इंसान अपने भीतर झाँकने आता है। ये स्थान केवल धार्मिक न होकर आत्मिक यात्रा के ऐसे पड़ाव हैं जहाँ प्रकृति, इतिहास, श्रद्धा और साहस — सब एक

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बेताब वैली: कश्मीर की गोद में बसी फिल्मी कल्पनाओं से भी खूबसूरत हकीकत

बेताब वैली – प्राकृतिक सौंदर्य और भावनात्मक गहराई का मिलन बेताब वैली, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित एक मंत्रमुग्ध कर देने वाली घाटी है, जो पहलगाम से महज़ 7 किलोमीटर दूर है। यह वही स्थान है, जहां 1983 में सनी देओल और अमृता सिंह की पहली फिल्म “बेताब” की शूटिंग हुई थी, और उसी

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बंगस वैली: कश्मीर की छुपी हुई स्वर्गरूपी घाटी, जहाँ प्रकृति खुद ध्यान लगाती है

बंगस घाटी – कुपवाड़ा की गोद में बसा एक अविज्ञात सौंदर्य कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में स्थित बंगस वैली आज भी एक ‘अनछुआ स्वर्ग’ है—जहाँ तक बहुत कम लोग पहुँचे हैं, लेकिन जो पहुँचे हैं, वो फिर लौटकर बार-बार आना चाहते हैं। श्रीनगर से लगभग 150 किमी दूर, समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊँचाई

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पहलगाम: नदियों, वनों और वादियों का जादुई संगम

पहलगाम – कश्मीर की आत्मा में बसी एक शांत स्वर्ग पहलगाम, जिसका अर्थ होता है “भेड़-बकरियों का गांव”, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित एक मनोहारी और शांति से भरी हुई जगह है। यह श्रीनगर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और समुद्र तल से लगभग 7,200 फीट की ऊँचाई पर बसा