आज़ादी से आत्मनिर्भरता तक: महिला, बाल विकास और जनकल्याण की राष्ट्रीय यात्रा
प्रस्तावना: स्वतंत्र भारत में सामाजिक पुनर्निर्माण का संकल्प 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ, तब देश की जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग—महिलाएं और बच्चे—सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से अत्यंत पिछड़े थे। आज़ादी की सुबह केवल राजनैतिक स्वाधीनता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समता की रोशनी भी लेकर आई। संविधान निर्माताओं ने महिलाओं




