
फिरोज़ गांधी ने भ्रष्टाचार रोका था, मोदी ने उसे संस्थागत बना दिया
भारत के राजनीतिक इतिहास में 68 साल पहले एक ऐसा अध्याय लिखा गया था जिसने लोकतंत्र को मजबूती दी, और सत्ता को यह एहसास कराया कि वह जनता की सेवक है, मालिक नहीं। वह दौर था जब संसद में एक सांसद के सवाल से पूरी सरकार हिल जाती थी। और वह सांसद कोई साधारण व्यक्ति








