अमनप्रीत | चंडीगढ़ 21 नवंबर 2025
देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर सबसे बड़ा हमला करते हुए ‘वोट चोरी’ अब एक संगठित राजनीतिक हथियार बन चुका है—और इसका पर्दाफाश कोई और नहीं, कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार ठोस सबूतों के साथ करते आ रहे हैं। यह आरोप अब किसी एक राज्य या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में चुनावी धांधलियों की सुनियोजित मशीनरी चलने की बात खुलकर सामने आ रही है। बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, और अब पंजाब—हर जगह एक ही पैटर्न, एक ही खेल और एक ही निशाना: लोकतंत्र को कमजोर करो और सत्ता पर कब्जा बनाए रखो।
इसी ‘वोट चोरी’ के खिलाफ पंजाब कांग्रेस ने एक अभूतपूर्व जन-आंदोलन खड़ा किया। महीनों तक पूरे पंजाब में प्रदर्शन हुए, गांव-गांव में कैंप लगे, और ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ हस्ताक्षर अभियान ने एक जनसैलाब का रूप ले लिया। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग (Raja Brar) और हजारों नेताओं–कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों की शिकायतें, गुस्सा और पीड़ा को इकट्ठा किया। नतीजा—27 लाख फॉर्म, जिनमें जनता ने साफ कहा: “हमारा वोट हमारी आवाज़ है, इसे चुराने का हक किसी को नहीं।”
इतिहास में पहली बार किसी राज्य से इतनी विशाल संख्या में शिकायतें इकट्ठा हुई हैं, जो यह साबित करती हैं कि जनता BJP की इस चुनावी साजिश को समझ चुकी है और अब चुप रहने वाली नहीं। पंजाब के इन 27 लाख फॉर्मों को आज दिल्ली में कांग्रेस महासचिव और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल, तथा CLP नेता प्रताप बाजवा की मौजूदगी में संगठन महासचिव KC वेणुगोपाल को सौंपा गया।
भूपेश बघेल ने साफ कहा कि यह सिर्फ पंजाब की लड़ाई नहीं—यह भारत के संविधान की लड़ाई है, और देश के हर राज्य से ऐसे फॉर्म जुटाए जा रहे हैं। जब सभी राज्यों के दस्तावेज इकट्ठे हो जाएंगे, तब उन्हें एक साथ महामहिम राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा, ताकि इस ‘वोट लूट उद्योग’ की राष्ट्रीय स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग की जा सके।
कांग्रेस का यह कदम सिर्फ विरोध नहीं—यह सीधा संदेश है कि लोकतंत्र को कुचलने वाले चाहे कितने भी शक्तिशाली हों, जनता की आवाज़ आखिरकार उनके सिंहासन को हिला देती है। BJP पर लगाया गया ‘वोट चोरी’ का आरोप अब आंदोलन का रूप ले चुका है… और दिल्ली आज इस लड़ाई की अगली कड़ी बनी।




