बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 5 नवंबर 2025
दिल दहला देने वाला रेल हादसा सामने आया, जब बिलासपुर रेल मंडल के भीतर चल रही एक लोकल पैसेंजर ट्रेन मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गई। इस भयावह टक्कर ने वहां मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मचा दी। हादसे में अभी तक कम से कम छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की आशंका है। अँधेरा बढ़ता गया और प्लेटफार्म पर चीख-पुकार की आवाज़ों के बीच बचाव दल तुरंत घटना स्थल पर पहुँचा, लेकिन मलबे में दबे यात्रियों तक पहुंचना मुश्किल होता जा रहा था। रात होते-होते यह दुर्घटना सवालों का ढेर छोड़ गई है — क्या रेल सुरक्षा सिर्फ कागजों में ही सुरक्षित है?
सूत्रों के अनुसार, यह हादसा उस वक्त हुआ जब सिग्नल और मार्ग की जानकारी में भारी चूक के चलते लोकल ट्रेन सीधे पटरी पर खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लोकल ट्रेन का अगला हिस्सा मालगाड़ी के डब्बों पर चढ़ गया और कोच की पूरी संरचना चकनाचूर हो गई। कई यात्री बुरी तरह फँस गए जिन्हें गैस कटर से काटकर बाहर निकाला गया। रेलवे के इंजीनियर और आपदा प्रबंधन दल लगातार राहत कार्य में जुटे हैं, लेकिन मलबा हटाने में समय लग रहा है।
रेलवे अधिकारियों ने दुर्घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि घटना की वजह का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी में सिग्नलिंग सिस्टम की विफलता और मानव भूल की संभावना समझी जा रही है, लेकिन अधिकारी अभी किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से बच रहे हैं। वहीं स्थानीय यात्रियों और चश्मदीदों का आरोप है कि रेलवे की लापरवाही और सिस्टम में खामियों की वजह से यह त्रासदी हुई। उनका यह भी कहना है कि हादसे के तुरंत बाद संचार व्यवस्था ठप रही, जिस कारण जानकारी एकत्र करने में देरी हुई और राहत में बाधा पड़ी।
दुर्घटना स्थल पर अराजक स्थिति साफ देखी गई — किसी के हाथ में अपने घायल परिवारजन का जूता था, तो कोई मोबाइल टॉर्च जलाकर किसी को खोज रहा था। अस्पतालों में भारी भीड़ उमड़ने लगी है, जहाँ कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा देने की घोषणा की है, लेकिन जनता सवाल उठा रही है कि एक और रेल हादसा क्यों? आखिर कब तक जानलेवा चूक के लिए यात्रियों को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ेगी?
रेल सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय रेल का सुरक्षा तंत्र आज भी संवेदनशील और कमज़ोर है। आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रैक मॉनिटरिंग और ऑटोमैटिक ट्रेन स्टॉप सिस्टम की भारी कमी अभी भी जानलेवा साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसा — अगर सिस्टम समय पर चेतावनी देता तो रोका जा सकता था। बिलासपुर हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं —यह चेतावनी है कि रेल सुरक्षा की कहानियाँ वास्तविकता से बहुत दूर हैं।
छह जानें जा चुकी हैं, लेकिन ऐसे हादसों से सीखा कब जाएगा — सबसे बड़ा सवाल है।




