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मुख्यमंत्री या महंत, एक पद छोड़ें योगी

अविमुक्तेश्वरानंद : मुख्यमंत्री या महंत, एक पद छोड़ें योगी; भगवा पहनकर मीट का कारोबार नहीं हो सकता

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 9 फरवरी 2026

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता–धर्म के रिश्ते पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एक सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री या महंत—इन दोनों में से एक पद छोड़ना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सत्ता और सन्यास के दायित्व एक साथ निभाना न तो नैतिक रूप से उचित है और न ही धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप। उन्होंने यह भी कहा कि भगवा पहनने वाला व्यक्ति मांस व्यापार या उससे जुड़े किसी भी सरकारी संरक्षण का समर्थन नहीं कर सकता।

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री रहते हुए महंत बने रहना धार्मिक परंपराओं के विपरीत है। उनके अनुसार सन्यासी का जीवन त्याग, वैराग्य और लोककल्याण के लिए होता है, जबकि मुख्यमंत्री का दायित्व प्रशासन, नीति और सत्ता से जुड़ा होता है। दोनों भूमिकाओं की प्रकृति अलग है और दोनों को एक साथ निभाने से संदेश गलत जाता है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनती है और धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल होने लगता है।

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी की तुलना “खलीफा जैसे शासक” से करते हुए कहा कि जब कोई धार्मिक पहचान के साथ सत्ता में बैठता है, तो उससे अपेक्षा होती है कि वह धर्म की मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में एक तरफ गोहत्या और धार्मिक आस्थाओं की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर मीट निर्यात और मांस उद्योग को बढ़ावा दिया जाता है।अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भगवा वस्त्र धारण करने वाला व्यक्ति मांस व्यापार का समर्थन नहीं कर सकता, क्योंकि यह धार्मिक मूल्यों के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सत्ता में रहकर ऐसे फैसलों पर मुहर लगाता है, जो उसके धार्मिक दायित्वों से टकराते हों, तो यह पाखंड की श्रेणी में आता है। उनके मुताबिक धर्म का उपयोग वोट और सत्ता के लिए करना सबसे बड़ा अनाचार है। शंकराचार्य ने कहा कि सन्यास का अर्थ सत्ता से दूरी होता है, न कि सत्ता के शीर्ष पर बैठना। अगर योगी आदित्यनाथ राजनीति करना चाहते हैं, तो उन्हें महंत का पद छोड़ देना चाहिए और अगर महंत बने रहना चाहते हैं, तो सत्ता से दूर हो जाना चाहिए।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने अविमुक्तेश्वरानंद के बयान को योगी सरकार की नीतियों पर सीधा सवाल बताया है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे व्यक्तिगत टिप्पणी करार दे रहा है। हालांकि, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच इस बयान को लेकर बहस शुरू हो गई है कि क्या धर्म और सत्ता को एक ही व्यक्ति के हाथ में होना चाहिए।

अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान के अंत में कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर हमला करना नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा और नैतिकता की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि यदि धर्म को बचाना है, तो उसे राजनीति से ऊपर रखना होगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान, शासन और नैतिकता को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।

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