एबीसी डेस्क 27 दिसंबर 2025
नई दिल्ली/गुवाहाटी — असम में मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग ने एक अहम और संवेदनशील फैसला लिया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें करीब 10 लाख 50 हजार नाम हटाए गए हैं। यह कदम मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे नाम मतदाता सूची में दर्ज थे, जो या तो डुप्लीकेट थे, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो चुके थे, मृत मतदाताओं से जुड़े थे या फिर योग्यता के मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इन्हीं कारणों से विस्तृत जांच और सत्यापन के बाद इन नामों को ड्राफ्ट सूची से हटाया गया है।
घर-घर सत्यापन और दस्तावेज़ी जांच का नतीजा
असम में यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। दूर-दराज़ के इलाकों, सीमावर्ती जिलों और संवेदनशील क्षेत्रों में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने घर-घर जाकर सत्यापन किया। आधार, राशन कार्ड, निवास प्रमाण जैसे दस्तावेज़ों की जांच के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई गई। आयोग का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय या समूह को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
ड्राफ्ट सूची पर आपत्ति का मौका
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है, अंतिम नहीं। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं या जिनको लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से बाहर कर दिया गया है, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने और दावा प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा। तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज़ देने पर नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस फैसले के बाद असम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने चिंता जताई है कि कहीं वास्तविक मतदाताओं के नाम तो नहीं कट गए, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे स्वच्छ चुनाव प्रक्रिया की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है। आम लोगों के बीच भी सवाल हैं, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी कि अंतिम सूची निष्पक्ष और त्रुटिरहित होगी।
आयोग का संदेश साफ
चुनाव आयोग का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि मतदाता सूची सही हो, ताकि हर योग्य आदमी का वोट सुरक्षित रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में न बना रहे। असम में जारी यह प्रक्रिया आने वाले चुनावों से पहले विश्वास बहाली की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल, निगाहें अब आपत्तियों की प्रक्रिया और उसके बाद आने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि असम का लोकतांत्रिक चेहरा कितना संतुलित और न्यायपूर्ण दिखेगा।




