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संक्रमण से जुड़े भारत में करीब 1.9 लाख कैंसर मामले, लैंसेट अध्ययन में बड़ा खुलासा

स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 सितंबर 2026

भारत में वर्ष 2024 के दौरान कैंसर के करीब 1.90 लाख मामले ऐसे थे, जिनका संबंध वायरस और बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों से था। यह जानकारी The Lancet Oncology में प्रकाशित एक अध्ययन के आधार पर सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक, दुनियाभर में 2024 में सामने आए करीब 23 लाख नए कैंसर मामले, यानी कुल कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत, संक्रमण से जुड़े थे। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण से जुड़े कैंसर के कई कारणों को समय रहते रोकथाम, टीकाकरण, जांच और उचित उपचार के जरिए कम किया जा सकता है। भारत में यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है और संक्रमण से जुड़े मामलों की बड़ी संख्या सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने रोकथाम के लिए एक स्पष्ट अवसर भी पेश करती है।

अध्ययन के अनुसार, भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी HPV से जुड़ा है। HPV एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर के लिए प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। भारत में HPV से जुड़े संक्रमणों के कारण एक लाख से अधिक कैंसर मामले होने का अनुमान लगाया गया है। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में HPV टीकाकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत ने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर HPV टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है और अब तक 80 लाख से अधिक यानी करीब 8 मिलियन खुराकें दी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक टीकाकरण के साथ नियमित स्क्रीनिंग और समय पर इलाज को मजबूत किया जाए तो HPV से जुड़े कैंसर के बोझ को भविष्य में काफी हद तक कम किया जा सकता है।

संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी यानी H. pylori भी एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में सामने आया है। यह पेट में पाया जाने वाला एक प्रकार का बैक्टीरिया है और इसके लंबे समय तक बने रहने वाले संक्रमण का संबंध मुख्य रूप से गैस्ट्रिक यानी पेट के कैंसर से है। अध्ययन के अनुसार, भारत में H. pylori संक्रमण से जुड़े करीब 47,000 कैंसर मामले दर्ज होने का अनुमान है। इसके अलावा एपस्टीन-बार वायरस (EBV) से लगभग 22,000 मामले, हेपेटाइटिस B वायरस से करीब 10,000 मामले और हेपेटाइटिस C वायरस से लगभग 5,300 कैंसर मामलों के जुड़े होने का अनुमान लगाया गया है। ये आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि कैंसर की रोकथाम की रणनीति केवल कैंसर के इलाज तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि संक्रमणों की पहचान और रोकथाम को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना होगा।

हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C के संक्रमण का संबंध मुख्य रूप से लिवर कैंसर से है। लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और कुछ मामलों में हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा यानी HCC का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण की समय पर पहचान, उचित चिकित्सा निगरानी और उपलब्ध निवारक उपायों के इस्तेमाल से ऐसे कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि संक्रमण से जुड़े कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। कई मामलों में व्यक्ति को लंबे समय तक संक्रमण के बारे में जानकारी नहीं होती और बीमारी का पता तब चलता है जब जटिलताएं बढ़ चुकी होती हैं। ऐसे में समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

विश्व स्तर पर सामने आए आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। अध्ययन के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे, जो उस वर्ष दर्ज कुल कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत था। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर संक्रमण कैंसर में बदलता है, बल्कि कुछ विशेष संक्रमणों और कैंसर के बीच स्थापित संबंधों के आधार पर इन मामलों का अनुमान लगाया गया है। इसलिए विशेषज्ञ रोकथाम के उपायों पर जोर दे रहे हैं। इनमें टीकाकरण, संक्रमण की समय पर पहचान, नियमित स्क्रीनिंग और आवश्यक होने पर उचित उपचार शामिल हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर इन उपायों को मजबूत करने से संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।

भारत में राष्ट्रीय HPV टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है। हालांकि, केवल टीकाकरण पर्याप्त नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण के साथ लोगों में कैंसर और संक्रमण से जुड़े जोखिमों को लेकर जागरूकता बढ़ाना, स्क्रीनिंग की पहुंच बेहतर करना और जिन लोगों में संक्रमण पाया जाता है, उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना भी जरूरी है। खास तौर पर सर्वाइकल कैंसर जैसे रोगों में शुरुआती पहचान उपचार के विकल्पों और परिणामों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती केवल नए कैंसर मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि ऐसे मामलों को रोकना भी है जिन्हें प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के जरिए पहले ही कम किया जा सकता है।

लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन के आंकड़े भारत के सामने कैंसर की रोकथाम को लेकर एक अहम तस्वीर रखते हैं। करीब 1.90 लाख संक्रमण से जुड़े कैंसर मामले यह बताते हैं कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में संक्रमण नियंत्रण की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। HPV के खिलाफ टीकाकरण, हेपेटाइटिस से बचाव और समय पर जांच, H. pylori जैसे संक्रमणों की पहचान तथा आवश्यक उपचार जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, अध्ययन के आंकड़े 2024 के हैं और इनका उद्देश्य संक्रमण से जुड़े कैंसर के बोझ का अनुमान लगाना है। आने वाले वर्षों में टीकाकरण, स्क्रीनिंग और उपचार की पहुंच कितनी बढ़ती है, इसका असर भविष्य में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों पर दिखाई दे सकता है।

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