अमरनाथ प्रसाद | मुंबई 4 जनवरी 2026
महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर चल रहा तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रमुख नेता अजित पवार ने 2 जनवरी 2026 को पिंपरी-चिंचवड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी पर तीखा और सीधा हमला बोला। यह बयान ऐसे समय आया है जब 15 जनवरी 2026 को होने वाले पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे नगर निगम चुनाव बेहद करीब हैं और स्थानीय स्तर पर एनसीपी तथा बीजेपी आमने-सामने हैं। अजित पवार के आरोपों ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है और साथ ही राज्य सरकार में शामिल सहयोगी दलों के बीच बढ़ते मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। अजित पवार ने BJP पर हफ्ताखोरी का आरोप लगाते हुए कहा- “मेरे पास सबूत हैं”
अजित पवार ने आरोप लगाया कि पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (PCMC) में बीजेपी के शासनकाल (2017-2022) और उसके बाद 2022 से लागू प्रशासक राज के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, लूट और हफ्ता वसूली हुई। उन्होंने कहा कि जो PCMC कभी एशिया की सबसे अमीर महानगरपालिकाओं में गिनी जाती थी, वह आज तेजी से कर्ज में डूबती जा रही है। पवार के मुताबिक, जहां एक ओर महानगरपालिका के फिक्स्ड डिपॉजिट लगातार घटते गए, वहीं दूसरी ओर बॉन्ड लोन का बोझ बढ़ाया गया, जिससे नगर निकाय की वित्तीय हालत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी अजित पवार ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ ठेकेदारों ने मिलकर एक “रिंग” बना ली, जिसके जरिए टेंडर अपने लोगों को दिलाए गए। टेंडर की रकम बढ़ाई गई, दस्तावेजों में व्हाइटनर लगाकर हेरफेर किया गया और काम की लागत कई गुना बढ़ा दी गई। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ 1.5 किलोमीटर सड़क के लिए 81 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, जो किसी भी आम आदमी को हैरान कर देने वाला आंकड़ा है। इसके अलावा उन्होंने सड़क खुदाई माफिया, अतिक्रमणों पर हफ्ता वसूली, कुत्तों की नसबंदी, शिक्षा और अन्य नागरिक परियोजनाओं में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
अजित पवार ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “मेरे पास सभी सबूत हैं। यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि लूट का पूरा संगठित गिरोह काम कर रहा है। बीजेपी की राक्षसी भूख अब बर्दाश्त नहीं होती।” उन्होंने अपने ऊपर लगे 70 हजार करोड़ रुपये के कथित सिंचाई घोटाले के पुराने आरोपों का भी जिक्र करते हुए तंज कसा कि “जिन लोगों ने मुझ पर आरोप लगाए थे, आज उन्हीं के साथ मैं सरकार में बैठा हूं।” इस बयान को महायुति के भीतर बढ़ती असहजता का संकेत माना जा रहा है।
बीजेपी ने इन आरोपों पर तुरंत पलटवार किया। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अगर हम बोलने लगे, तो अजित पवार खुद मुश्किल में पड़ जाएंगे।” चव्हाण ने यह सवाल भी उठाया कि क्या ये आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पार्टी पर लगाए जा रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने अजित पवार के आरोपों को चुनावी स्टंट करार दिया और दावा किया कि PCMC में उनके कार्यकाल के दौरान कई बड़े विकास कार्य हुए हैं। साथ ही, अजित पवार के पुराने विवादों और आरोपों को भी याद दिलाया गया।
इस पूरे विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम है। पिंपरी-चिंचवड़ में 2017 से पहले एनसीपी का दबदबा रहा, लेकिन 2017 के नगर निगम चुनावों में बीजेपी ने सत्ता हासिल कर ली। अब 2026 के चुनावों में अजित पवार गुट और शरद पवार गुट (एनसीपी-एसपी) ने स्थानीय स्तर पर गठबंधन किया है, जबकि बीजेपी या तो अकेले या शिंदे गुट की शिवसेना के साथ चुनावी मैदान में है। राज्य सरकार में भले ही ये दल एक-दूसरे के सहयोगी हों, लेकिन स्थानीय चुनाव और सीट बंटवारे को लेकर टकराव खुलकर सामने आ रहा है।
विपक्ष ने भी इस मौके पर तंज कसने में देर नहीं लगाई। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि अगर अजित पवार बीजेपी पर भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो उन्हें सरकार में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अजित पवार को सरकार छोड़कर शरद पवार गुट में लौट जाना चाहिए।
4 जनवरी 2026 तक की स्थिति यह है कि आरोप-प्रत्यारोप तेज हो चुके हैं, लेकिन महायुति गठबंधन पर फिलहाल कोई बड़ा संकट नहीं दिख रहा। यह साफ है कि पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे नगर निगम चुनावों में भ्रष्टाचार का मुद्दा केंद्र में रहेगा। अजित पवार ने सबूत सामने रखने का वादा किया है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुल मिलाकर, यह पूरा विवाद चुनावी राजनीति की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां सहयोगी दल राज्य में साथ-साथ सरकार चलाते हुए स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे पर खुलकर हमलावर हैं।




