Home » National » अडानी की सरकार, अडानी के लिए, अडानी द्वारा…

अडानी की सरकार, अडानी के लिए, अडानी द्वारा…

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी डेस्क 18 दिसंबर 2025

न्याय व्यवस्था पर सवाल

जब कोई जज अडानी समूह से जुड़ी कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाता है, जुर्माना लगाता है, CAG ऑडिट की बात करता है और उसी दिन उसका तबादला हो जाता है, तो आम आदमी के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या यह सिर्फ संयोग है, या फिर बड़े कारोबारी हितों और सत्ता के रिश्ते की झलक? इसी पृष्ठभूमि में यह मामला “अडानी के लिए, अडानी द्वारा, अडानी की सरकार?” जैसे तीखे सवालों के साथ चर्चा में है।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद 2007 से जुड़ा है, जब छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया। राजस्थान सरकार की बिजली कंपनी RRVUNL ने परसा कांते कोलियरीज के साथ साझेदारी की, जिसमें अडानी समूह की 74% हिस्सेदारी बताई जाती है। समझौता यह था कि कोयला रेल मार्ग से राजस्थान पहुंचेगा।

रेल नहीं बनी, सड़क से ढुलाई हुई

रेलवे साइडिंग समय पर नहीं बन पाई। नतीजा यह हुआ कि कोयला ट्रकों से सड़क मार्ग के जरिए लाया गया, जो कहीं ज्यादा महंगा पड़ा। सवाल उठा कि इस अतिरिक्त खर्च का बोझ किसे उठाना चाहिए—सरकारी कंपनी को या परियोजना से जुड़ी निजी कंपनी को?

निचली अदालत का सख्त रुख

जयपुर की अदालत ने माना कि महंगे सड़क परिवहन का खर्च परियोजना चलाने वाली कंपनी को खुद उठाना चाहिए था। अदालत ने 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और पूरे मामले की CAG ऑडिट की सिफारिश की, ताकि सरकारी पैसे के इस्तेमाल की साफ तस्वीर सामने आ सके।

उसी दिन जज का तबादला

फैसले के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यहीं से उठा—जिस दिन यह आदेश आया, उसी दिन जज का तबादला कर दिया गया। प्रशासन ने इसे रूटीन ट्रांसफर बताया, लेकिन समय ने संदेह को जन्म दिया। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे न्यायपालिका पर दबाव से जोड़कर देखा जाने लगा।

हाईकोर्ट की रोक

मामला आगे बढ़ा तो राजस्थान हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को निचली अदालत के आदेश पर स्टे लगा दिया। अब अगली सुनवाई जनवरी 2026 के आखिर में तय है। तब तक न जुर्माना लागू होगा और न ही ऑडिट आगे बढ़ेगी।

राजनीतिक आरोप और जवाब

विपक्ष और कई सामाजिक आवाज़ों ने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम कॉरपोरेट हितों के पक्ष में सत्ता की सक्रियता को दिखाता है। वहीं सरकार और अडानी समूह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जजों के तबादले नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और किसी एक फैसले से जोड़ना गलत है।

आम आदमी के मन में उठता सवाल

यह मामला अब सिर्फ कोयला परिवहन या जुर्माने का नहीं रहा। सवाल यह है— अगर बड़े कारोबारी समूह के खिलाफ फैसला देने पर जज का उसी दिन तबादला हो जाए, तो क्या न्याय सचमुच निडर रह पाता है? इसका जवाब आने वाले समय में अदालतों की सुनवाई और तथ्यों की पड़ताल से ही सामने आएगा।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments