अनिल यादव। 29 नवंबर 2025
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, संस्थानों और सरकारी-अर्धसरकारी निकायों को स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड को अब ‘जन्म तिथि के प्रमाण’ के रूप में मान्य नहीं किया जाएगा। यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से विभिन्न सरकारी सेवाओं, योजनाओं, स्कूल-कॉलेजों, अस्पतालों, स्थानीय निकायों और दस्तावेज़ी कार्यों में लोग जन्म-तिथि साबित करने के लिए आधार कार्ड का उपयोग करते रहे हैं। सरकार के इस नए फैसले से अब आधार की भूमिका सीमित हो जाएगी और जन्म-तिथि के सत्यापन के लिए अन्य वैध प्रमाण पत्र अनिवार्य होंगे।
सरकारी आदेश के अनुसार, आधार कार्ड का मूल उद्देश्य सिर्फ एक पहचान दस्तावेज (Identity Proof) और पते का प्रमाण (Address Proof) प्रदान करना है, न कि जन्म तिथि का आधिकारिक प्रमाण देना। यह निर्णय UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के उस स्पष्टीकरण के अनुरूप है जिसमें संस्थान ने कई बार कहा है कि आधार कार्ड पर दर्ज जन्म तिथि ‘स्व-घोषित’ (self-declared) हो सकती है और कई मामलों में यह सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि दिए गए विवरणों पर आधारित रहती है। यही वजह है कि कई सरकारी विभागों और न्यायिक मामलों में आधार को पहले से ही जन्म तिथि के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता था।
फैसले के पीछे सरकार का तर्क है कि पिछले वर्षों में जन्म तिथि से जुड़े हजारों विवाद, उम्र संबंधी गलत जानकारियाँ, फर्जी तिथि अपडेट, और दस्तावेज़ों में मिलान न होने जैसी समस्याएँ बढ़ी हैं। स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, नियुक्ति बोर्ड, चयन आयोग और पेंशन विभागों ने कई बार यह शिकायत की कि आधार आधारित जन्म तिथि सत्यापन में गम्भीर त्रुटियाँ पाई जाती हैं। इससे न सिर्फ चयन प्रक्रियाएँ प्रभावित होती थीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग भी आसानी से संभव हो जाता था। अब इस आदेश के लागू हो जाने के बाद, विभागों को सख्ती से यह सुनिश्चित करना है कि जन्म तिथि केवल उन्हीं दस्तावेज़ों से प्रमाणित की जाए जिन्हें विधिक रूप से मान्यता प्राप्त है—जैसे जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate), स्कूल का प्रमाण पत्र (School Leaving Certificate / High School Certificate), पासपोर्ट, या सरकार द्वारा निर्धारित अन्य वैध रिकॉर्ड।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने, दस्तावेज़ी कुप्रथाओं को रोकने, भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक विश्वसनीय बनाने और नागरिक डेटा को सही रखने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। आदेश में यह भी जोड़ा गया है कि सभी विभाग इस निर्देश को तुरंत प्रभाव से लागू करें और किसी भी प्रकार की छूट न दें। भविष्य में कोई भी सरकारी आवेदन—चाहे वह नौकरी से जुड़ा हो, छात्रवृत्ति से, पेंशन से, जाति/निवास प्रमाण पत्र से, या सरकारी योजनाओं से—जन्म तिथि के मामले में आधार कार्ड को ‘अमान्य’ माना जाएगा।
इस फैसले से प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय लंबे समय में लाभकारी साबित होगा क्योंकि इससे नागरिक दस्तावेज़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गलत उम्र बताकर लाभ लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। हालांकि, आम जनता के लिए प्रारंभिक चरण में थोड़ी दिक्कतें भी आ सकती हैं, क्योंकि बहुत से लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होता या उनका रिकॉर्ड पुराना है। ऐसे मामलों में सरकार ने स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों को वैकल्पिक दस्तावेज़ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल और सुगम बनाने का निर्देश दिया है।
कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह आदेश आधार कार्ड की उपयोगिता को पुनर्परिभाषित करता है और दस्तावेज़ी प्रमाणिकता को मजबूत करता है। यह फैसला आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और नागरिक व्यवस्था पर व्यापक असर डालेगा—जहाँ पहचान और जन्म तिथि अब दो अलग-अलग श्रेणियों में अधिक स्पष्टता के साथ परिभाषित होंगी।





