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हिमाचल में शिक्षा परिसर पर दाग : कॉलेज प्रोफेसर और तीन छात्राओं पर रैगिंग व यौन उत्पीड़न का केस

हिमाचल प्रदेश के एक कॉलेज से सामने आई यह खबर न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां एक कॉलेज प्रोफेसर और तीन छात्राओं के खिलाफ रैगिंग और यौन उत्पीड़न के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई एक जूनियर छात्रा की शिकायत के बाद हुई, जिसने हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुई कथित प्रताड़ना को सामने रखा।

पीड़िता के अनुसार, कॉलेज में पढ़ाई शुरू करने के बाद से ही उसे सीनियर छात्राओं द्वारा रैगिंग के नाम पर मानसिक रूप से परेशान किया गया। आरोप है कि उसे अपमानित किया गया, डराया गया और बार-बार असहज हालात में डाला गया। मामला तब और गंभीर हो गया, जब एक प्रोफेसर पर भी अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। पीड़िता का कहना है कि जिस जगह से उसे संरक्षण और न्याय की उम्मीद थी, वहीं से उसे डर और दबाव का सामना करना पड़ा।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। कॉलेज प्रशासन से भी पूरे मामले पर जवाब मांगा गया है। यह भी जांच का विषय है कि क्या पहले ऐसी शिकायतें हुई थीं और अगर हुईं, तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और एंटी-रैगिंग व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रैगिंग और यौन उत्पीड़न सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि मानव गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य का भी मामला है। कॉलेज जैसे स्थान, जहां छात्र अपने सपने और भविष्य गढ़ने आते हैं, अगर वही असुरक्षित बन जाएं तो इसका असर जीवन भर रहता है।

फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने समाज और शिक्षा जगत को साफ संदेश दिया है कि रैगिंग और उत्पीड़न के लिए शून्य सहनशीलता ही एकमात्र रास्ता है, ताकि छात्र बिना डर के पढ़ सकें और अपनी आवाज़ उठा सकें।

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