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PM–HM से दो घंटे की अहम मुलाकात: देश की संस्थाओं की पारदर्शिता पर राहुल ने उठाई निर्णायक आवाज

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महेंद्र सिंह। नई दिल्ली 10 दिसंबर 2025

नई दिल्ली। संसद सत्र के बीच बुधवार को हुई एक महत्वपूर्ण और चर्चित मुलाकात ने दिल्ली की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। कांग्रेस नेता और विपक्ष के प्रमुख चेहरे राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दो घंटे तक लंबी और गंभीर बातचीत की। यह बैठक भले ही बंद कमरे में हुई, लेकिन इसके संकेत साफ हैं—राहुल गांधी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार के सामने अपनी मजबूत और तर्कसंगत बात रखी है।

बैठक का केंद्र बिंदु देश की दो बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाएँ थीं—सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) और सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC)। इन दोनों संस्थानों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ लंबित हैं। मुख्य सूचना आयुक्त, आठ सूचना आयुक्तों और विजिलेंस कमिश्नर जैसे शीर्ष पदों को भरने को लेकर सरकार ने जो सूची तैयार की है, उस पर राहुल गांधी ने गंभीर आपत्तियाँ जताईं और कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और दलगत राजनीति से मुक्त होनी चाहिए।

राहुल गांधी का यह रुख केवल विरोध के लिए विरोध नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी से प्रेरित था। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी संस्थाएँ जनता के प्रति जवाबदेह होती हैं—इसलिए इनकी नियुक्तियों में किसी भी तरह की संदेह की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। वे चाहते हैं कि संस्थानों की नींव मजबूत हो, उनकी विश्वसनीयता बढ़े और सरकार-विपक्ष मिलकर ऐसा मॉडल तैयार करें जो भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत करे।

इस मुलाकात से यह भी संदेश गया कि राहुल गांधी केवल संसद में भाषण देने या सरकार की आलोचना तक सीमित नेता नहीं हैं। जब मुद्दा राष्ट्रहित का हो, वे सीधे संवाद का रास्ता अपनाते हैं। दो घंटे की इस विस्तृत चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे संस्थागत सुधार के लिए गंभीर, रचनात्मक और दूरदर्शी नजरिया रखते हैं। उनकी पहल से यह उम्मीद भी जगी है कि भविष्य में सरकार और विपक्ष मिलकर राष्ट्रीय स्तर के फैसलों को ज्यादा जवाबदेह बना सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह मुलाकात राहुल गांधी के एक परिपक्व और जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उभरने का प्रतीक है। उन्होंने सरकार के सामने जो सवाल और सुझाव रखे, वे सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं थे—बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक पहल थे। यह बैठक आने वाले दिनों में देश की शीर्ष संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर नए अध्याय की शुरुआत भी हो सकती है।

अगर आप चाहें तो मैं इसी खबर को टीवी न्यूज़ स्टाइल में, या बुलेट पॉइंट फॉर्मेट में, या सोशल मीडिया पोस्ट के रूप में भी तैयार कर सकता हूँ।

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