भारत में डिजिटल क्रांति का नया अध्याय शुरू हो गया है। तमिलनाडु की टेक कंपनी Zoho Corporation द्वारा विकसित भारतीय मैसेजिंग ऐप “Arattai” (आरट्टई) अब खुलकर WhatsApp को चुनौती देने के लिए मैदान में उतर चुका है। दक्षिण भारत के इस देसी ऐप का नाम तमिल शब्द ‘आरट्टई’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है — “बातचीत” या “मित्रतापूर्ण चर्चा”। लेकिन इस बार यह चर्चा केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की ठोस दावेदारी बन चुकी है।
आरट्टई का लक्ष्य स्पष्ट है — भारतीय उपयोगकर्ताओं को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना जो डेटा गोपनीयता, स्वदेशी सर्वर और भारतीय मूल्यों की सुरक्षा पर आधारित हो। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू, जो पहले से ही Zoho जैसी विश्वप्रसिद्ध टेक कंपनी के CEO हैं, का कहना है कि “भारत अब उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनने के रास्ते पर है। हम अपनी डिजिटल संप्रभुता खुद तय करना चाहते हैं।”
ऐप के फीचर्स व्हाट्सएप और टेलीग्राम दोनों की झलक पेश करते हैं —
हाई-डेफिनिशन ऑडियो और वीडियो कॉलिंग
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन
ग्रुप चैट, चैनल और फाइल शेयरिंग
क्लाउड सिंक और डेटा स्टोरेज भारत स्थित सर्वरों पर
और सबसे खास बात — कोई विदेशी ट्रैकिंग नहीं, कोई विज्ञापन नहीं
इन विशेषताओं के साथ “आरट्टई” सीधे-सीधे भारतीय यूज़र्स के उस वर्ग को साधने की कोशिश कर रहा है जो पिछले कुछ वर्षों से विदेशी ऐप्स की डेटा पॉलिसी को लेकर चिंतित हैं। विशेष रूप से 2021 में व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी विवाद के बाद देश में “डेटा एटमैनिर्भरता” की चर्चा ने ज़ोर पकड़ा था।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आरट्टई का आगमन सिर्फ एक ऐप लॉन्च नहीं, बल्कि भारतीय डिजिटल स्वतंत्रता का राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीक है। यह वह समय है जब सरकार “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” अभियानों को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश कर रही है। इस माहौल में एक देसी, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-केंद्रित ऐप का उदय भारत की तकनीकी आत्मविश्वास का संकेत देता है।
हालांकि, चुनौती आसान नहीं है। व्हाट्सएप के भारत में 500 मिलियन से ज़्यादा यूज़र हैं, जबकि आरट्टई अभी शुरुआती चरण में है। लेकिन Zoho की ताकत — उसका एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर नेटवर्क और भारतीय डेवलपर इकोसिस्टम — इस ऐप को लंबी दौड़ का खिलाड़ी बना सकता है।
टेक इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि अगर आरट्टई स्थानीय भाषाओं में और अधिक सहज अनुभव प्रदान करता है, तो यह भारत के ग्रामीण और गैर-अंग्रेज़ी भाषी क्षेत्रों में “डिजिटल लोकतंत्र” का प्रतीक बन सकता है।
जैसा कि श्रीधर वेम्बू ने हाल ही में कहा, “हमें अब यह तय करना है कि हम संवाद के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहेंगे, या खुद अपनी आवाज़ को अपने सर्वर पर सुरक्षित रखेंगे।”
आरट्टई का संदेश साफ है —“बात सिर्फ चैट की नहीं, आत्मनिर्भरता की है।” भारत की तकनीकी दुनिया अब यह देखने को तैयार है कि क्या यह देसी ऐप दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाज़ार में विदेशी दिग्गजों के सामने “भारतीय गर्व” का झंडा गाड़ पाएगा।
डिजिटल डेटा सुरक्षा अधिनियम 2023 के संदर्भ में ‘आरट्टई’: भारतीय डेटा संप्रभुता की मिसाल और नीति-आधारित आत्मनिर्भरता का मॉडल है।
भारत ने वर्ष 2023 में जब Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act) पारित किया, तो उसने स्पष्ट कर दिया कि अब देश में डेटा सिर्फ एक तकनीकी विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और नागरिक अधिकारों का मामला है। इस अधिनियम का मूल सिद्धांत यही है कि “भारत में रहने वाले भारतीयों का डेटा भारत के कानूनों के अधीन रहेगा” — और इसी सिद्धांत को मूर्त रूप देने वाला पहला बड़ा प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है “आरट्टई (Arattai)”।
DPDP Act की धारा 4 और 9 स्पष्ट रूप से कहती है कि भारतीय नागरिकों के निजी डेटा को भारत के भीतर ही प्रोसेस किया जाना चाहिए, जब तक कि कोई आवश्यक अंतरराष्ट्रीय समझौता न हो। इसका अर्थ है कि डेटा का भंडारण, विश्लेषण और उपयोग किसी भी विदेशी इकाई या सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आ सकता। यहां “आरट्टई” एक आदर्श उदाहरण के रूप में सामने आता है — क्योंकि यह ऐप न केवल भारतीय कंपनी (Zoho Corporation) द्वारा विकसित किया गया है, बल्कि इसके सर्वर, डेटा सेंटर और एन्क्रिप्शन नेटवर्क पूरी तरह भारत की सीमाओं के भीतर स्थित हैं।
इसके विपरीत, व्हाट्सएप और अन्य विदेशी मैसेजिंग प्लेटफॉर्मों की सबसे बड़ी आलोचना यही रही है कि उनका डेटा ढांचा विदेशी न्याय क्षेत्र में आता है। व्हाट्सएप का डेटा सर्वर अमेरिका और सिंगापुर में स्थित है, और उसका डेटा प्रोसेसिंग कंट्रोल Meta (फेसबुक) के हाथों में है, जो अमेरिकी निगरानी और अंतरराष्ट्रीय डेटा एक्सेस नीतियों से बंधा हुआ है। इससे भारतीय उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी, संवाद पैटर्न, और संपर्क विवरण विदेशी कंपनियों की नीतियों के अधीन हो जाते हैं।
DPDP अधिनियम में “Consent-Based Processing” का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी कंपनी उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति के बिना डेटा का उपयोग या साझा नहीं कर सकती। “आरट्टई” इस नीति का सबसे सटीक अनुपालन करता है — क्योंकि इसके संचालन मॉडल में डेटा का कोई व्यावसायिक दोहन नहीं होता। कंपनी उपयोगकर्ता की जानकारी का इस्तेमाल विज्ञापन, विश्लेषण या मार्केटिंग के लिए नहीं करती, जो इसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल से भी अधिक नीतिगत रूप से पारदर्शी बनाता है।
इस अधिनियम की धारा 11 में “Significant Data Fiduciary” की परिभाषा दी गई है, जिसके अनुसार बड़ी टेक कंपनियों को विशेष अनुपालन और डेटा ऑडिट की आवश्यकता होती है। Zoho पहले से ही अपनी वैश्विक एंटरप्राइज़ सेवाओं में इन मानकों का पालन करती रही है। कंपनी का साइबर सुरक्षा आर्किटेक्चर ISO 27001 और SOC 2 Type II जैसी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रमाणन प्रणाली पर आधारित है। यानी “आरट्टई” न केवल भारतीय कानूनों का पालन करता है, बल्कि वैश्विक डेटा संरक्षण मानकों पर भी खरा उतरता है।
भारत सरकार की “Digital India” और “Make in India” नीतियां अब “Data for India” के नए चरण में प्रवेश कर चुकी हैं। DPDP Act ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डेटा अब संसाधन नहीं, बल्कि संविधान-सम्मत संपत्ति है। “आरट्टई” इस अवधारणा को जमीनी स्तर पर लागू कर रहा है। यह ऐप उन सभी प्रावधानों को स्वाभाविक रूप से समाहित करता है, जिनके लिए विदेशी कंपनियों को मजबूरी में अनुपालन करना पड़ता है। इससे “आरट्टई” केवल एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि Digital India Policy का प्रत्यक्ष अनुपालन मॉडल बन गया है।
नीतिगत दृष्टि से देखें तो यह ऐप भारतीय डेटा संप्रभुता की परिभाषा को नए आयाम देता है। DPDP अधिनियम की प्रस्तावना में लिखा गया है कि “डेटा का उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए, न कि आर्थिक शोषण।” आरट्टई इस भावना का जीता-जागता उदाहरण है — जहां संवाद, सुरक्षा और गोपनीयता को किसी व्यापारिक लाभ से ऊपर रखा गया है।
इस परिप्रेक्ष्य में “आरट्टई” को सिर्फ व्हाट्सएप का विकल्प कहना उसकी महत्ता को सीमित करना होगा। यह एक ऐसी अवधारणा है जो भारत के डेटा भविष्य की दिशा तय कर रही है — एक ऐसा भविष्य जहां भारतीय नागरिकों की डिजिटल पहचान किसी विदेशी सर्वर पर नहीं, बल्कि भारतीय संविधान की छत्रछाया में संरक्षित होगी।
कानूनी विशेषज्ञों के शब्दों में, “DPDP Act को समझने का सबसे सरल तरीका ‘आरट्टई’ को देखना है।” यह ऐप इस अधिनियम की आत्मा और भावना दोनों का प्रतिनिधित्व करता है — न केवल कानून के पालन में, बल्कि उसके उद्देश्य में भी। “आरट्टई अब सिर्फ एक चैट नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल अधिकारों का सजीव प्रतीक है — जहां हर संदेश सिर्फ भेजा नहीं जाता, बल्कि भारतीय संप्रभुता के तहत सुरक्षित रखा जाता है।”
कानूनी विश्लेषण: डिजिटल डेटा सुरक्षा अधिनियम 2023 (DPDP Act) के संदर्भ में ‘आरट्टई’ — भारत का नीति-अनुरूप और कानून-सम्मत डिजिटल मॉडल साबित होता है।
भारत का Digital Personal Data Protection Act, 2023 (DPDP Act) डिजिटल इतिहास का वह अध्याय है, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि नागरिकों का डेटा किसी कंपनी की संपत्ति नहीं, बल्कि एक संविधान-सम्मत अधिकार है। यह अधिनियम न केवल डेटा सुरक्षा का ढांचा प्रदान करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि नागरिकों की जानकारी भारत की सीमाओं के भीतर, भारतीय कानूनों के अधीन ही सुरक्षित रहे। इस दृष्टि से यदि कोई डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म इस अधिनियम की भावना और प्रावधानों के अनुरूप है, तो वह है Zoho Corporation का भारतीय मैसेजिंग ऐप — “आरट्टई (Arattai)”।
धारा 4 — डेटा का भौगोलिक नियंत्रण (Data Localization)
क्या कहती है धारा 4:
यह प्रावधान स्पष्ट करता है कि भारतीय नागरिकों का निजी डेटा भारत की सीमाओं के भीतर संग्रहीत और प्रोसेस किया जाना चाहिए। विदेशी सर्वरों पर डेटा ट्रांसफर तभी संभव है जब सरकार किसी विशेष देश को “विश्वसनीय डेटा साझेदार” के रूप में मान्यता दे।
‘आरट्टई’ का अनुपालन:
आरट्टई पूरी तरह से भारत-स्थित सर्वरों पर चलता है। Zoho Corporation ने अपने डेटा सेंटर भारत में ही स्थापित किए हैं, जिससे किसी विदेशी सरकार या कंपनी को उपयोगकर्ताओं के डेटा तक पहुंच नहीं है। यानी यह ऐप पूर्ण डेटा लोकलाइज़ेशन का अनुपालन करता है। इसके विपरीत, WhatsApp और Meta जैसे प्लेटफ़ॉर्म विदेशी सर्वरों का उपयोग करते हैं, जिससे डेटा विदेशी न्यायिक निगरानी के दायरे में चला जाता है।
धारा 9 — सहमति आधारित प्रोसेसिंग (Consent-Based Processing)
क्या कहती है धारा 9:
कोई भी डिजिटल इकाई उपयोगकर्ता का डेटा तब तक उपयोग या प्रोसेस नहीं कर सकती जब तक कि उसकी स्पष्ट सहमति न हो। सहमति स्पष्ट, सूचित और स्वैच्छिक होनी चाहिए।
‘आरट्टई’ का अनुपालन:
आरट्टई का पूरा संचालन इस सिद्धांत पर आधारित है कि उपयोगकर्ता का डेटा उसका अपना है। ऐप कोई विज्ञापन नहीं दिखाता, न ही डेटा तीसरे पक्ष को बेचता है। Zoho की गोपनीयता नीति पारदर्शी और सरल भाषा में बताती है कि ऐप किसी भी परिस्थिति में उपयोगकर्ता डेटा का व्यावसायिक उपयोग नहीं करता। यह व्हाट्सएप जैसे प्लेटफ़ॉर्म से भिन्न है, जो उपयोगकर्ताओं से “समेकित सहमति” लेकर डेटा का इस्तेमाल मार्केटिंग उद्देश्यों के लिए करता है।
धारा 11 — महत्वपूर्ण डेटा प्रबंधक (Significant Data Fiduciary)
क्या कहती है धारा 11:
ऐसी कंपनियां जिनके पास बड़ी मात्रा में उपयोगकर्ता डेटा है या जिनका प्रभाव व्यापक है, उन्हें “Significant Data Fiduciary” घोषित किया जा सकता है। इन पर अतिरिक्त सुरक्षा, अनुपालन और डेटा ऑडिट की जिम्मेदारी होती है।
‘आरट्टई’ का अनुपालन:
Zoho पहले से ही ISO 27001 और SOC 2 Type II जैसे अंतरराष्ट्रीय डेटा सुरक्षा मानकों का पालन करती है। इसके डेटा ऑडिट, एन्क्रिप्शन और एक्सेस कंट्रोल सिस्टम DPDP Act की आवश्यकताओं से अधिक कठोर हैं। Zoho की आंतरिक नीतियां “Zero Trust Architecture” पर आधारित हैं, जिसमें किसी भी डेटा प्रोसेसिंग को बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण के बाद ही अनुमति मिलती है। इस तरह “आरट्टई” कानूनी रूप से Significant Data Fiduciary की आवश्यकताओं को पहले से ही पूरा करता है।
धारा 16 — शिकायत और पारदर्शिता तंत्र (Grievance Redressal & Transparency)
क्या कहती है धारा 16:
प्रत्येक डिजिटल सेवा प्रदाता को एक पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करनी होगी, जिसमें उपयोगकर्ता को यह जानने का अधिकार हो कि उसका डेटा कैसे और कहां उपयोग किया जा रहा है।
‘आरट्टई’ का अनुपालन:
आरट्टई के भीतर ही एक पारदर्शी उपयोगकर्ता सहायता तंत्र (User Transparency Portal) मौजूद है, जहां उपयोगकर्ता अपने डेटा उपयोग और सुरक्षा की स्थिति देख सकता है। कंपनी की नीति यह है कि किसी भी सरकारी या निजी एजेंसी से डेटा मांगने पर उपयोगकर्ता को सूचना दी जाएगी, जब तक कि वह कानूनी आदेश न हो। यह “Right to Information in Data Usage” के भाव को साकार करता है, जिसे DPDP Act की धारा 16 समर्थन देती है।
‘आरट्टई’ एक नीति-अनुरूप मॉडल क्यों है
डिजिटल डेटा सुरक्षा अधिनियम 2023 का उद्देश्य केवल डेटा लीक या दुरुपयोग को रोकना नहीं, बल्कि भारत में एक विश्वसनीय डिजिटल वातावरण बनाना है, जहां नागरिक तकनीक का उपयोग आत्मविश्वास से कर सकें। “आरट्टई” इस दृष्टिकोण का सटीक प्रतिनिधित्व करता है। यह न केवल कानून का पालन करता है, बल्कि उसकी भावना — “नागरिकों का डेटा, नागरिकों के नियंत्रण में” — को आत्मसात करता है।
व्हाट्सएप जैसे ऐप्स का ढांचा अमेरिकी या यूरोपीय डेटा कानूनों से संचालित होता है, जिनकी प्राथमिकता भारतीय उपयोगकर्ता नहीं, उनके व्यावसायिक हित हैं। इसके विपरीत, “आरट्टई” भारतीय डिजिटल कानूनों और संस्कृति का प्रतिनिधि है — जहां निजता एक संवैधानिक अधिकार है, न कि एक “एप्लिकेशन सेटिंग”। दूसरे शब्दों में “आरट्टई” को अब सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि “DPDP Act 2023” की जीवंत व्याख्या कहा जा सकता है — वह मॉडल जो दिखाता है कि तकनीकी स्वतंत्रता और कानूनी अनुपालन साथ-साथ चल सकते हैं।




