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धरती जैसी दुनिया की खोज: अंतरिक्ष में जीवन की नई उम्मीद

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लंदन 6 अक्टूबर 2025

मानव सभ्यता के सबसे पुराने सवालों में से एक है — क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं? इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए वैज्ञानिक दशकों से एक ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जो हमारी धरती जैसी हो — जहाँ हवा हो, पानी हो, तापमान ठीक हो और शायद जीवन भी हो। अब यह खोज अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुकी है। NASA और दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिक मिलकर ऐसे ग्रहों की तलाश कर रहे हैं जो सूरज जैसे तारों के आसपास घूमते हैं और जहाँ जीवन की संभावना हो सकती है। यह खोज सिर्फ़ विज्ञान नहीं, बल्कि उम्मीद की तलाश बन गई है — एक नई धरती की तलाश।

हाल ही में वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे ग्रहों का पता लगाया है जो आकार, वातावरण और दूरी के लिहाज से धरती से काफी मिलते-जुलते हैं। इनमें सबसे ज़्यादा चर्चा TRAPPIST-1e और TOI-1846b नाम के ग्रहों की है। TRAPPIST-1e एक ऐसे तारामंडल में है जहाँ एक साथ सात छोटे ग्रह पाए गए हैं, और इनमें से तीन ग्रह उस “हैबिटेबल ज़ोन” यानी जीवन योग्य क्षेत्र में हैं जहाँ तापमान इतना संतुलित है कि पानी तरल रूप में रह सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर किसी ग्रह पर पानी मौजूद है, तो वहां जीवन के होने की संभावना बहुत ज़्यादा है।

NASA के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने इन ग्रहों की वायुमंडलीय परतों का बारीकी से अध्ययन किया है। अब वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन ग्रहों के वातावरण में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड या मीथेन जैसी गैसें हैं — क्योंकि यही गैसें जीवन की उपस्थिति का संकेत देती हैं। अगर इन ग्रहों में ऐसी संरचना मिलती है तो यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज साबित हो सकती है — क्योंकि इसका मतलब होगा कि धरती जैसी परिस्थितियां ब्रह्मांड में कहीं और भी मौजूद हैं।

इसी बीच TOI-1846 b नाम का एक और दिलचस्प ग्रह खोजा गया है जो धरती से लगभग 154 प्रकाश वर्ष दूर है। यह ग्रह आकार में धरती से दोगुना है और एक छोटे से लाल तारे (रेड ड्वार्फ) के चारों ओर घूमता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस ग्रह की सतह पर पानी मौजूद हो सकता है, हालांकि इसका तापमान और वायुमंडल अभी जीवन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं माना जा रहा। लेकिन यह खोज साबित करती है कि ब्रह्मांड में धरती जैसी परिस्थितियाँ बहुत दुर्लभ नहीं हैं — बस हमें उन्हें खोजने की क्षमता और धैर्य चाहिए।

इस पूरी खोज का सबसे रोमांचक पहलू यह है कि यह हमें न सिर्फ़ नई दुनियाओं से मिलाती है, बल्कि हमें अपनी धरती की अहमियत भी याद दिलाती है। जिस तरह वैज्ञानिक हर नए ग्रह पर जीवन के संकेत खोजते हैं, वे यह भी समझते हैं कि हमारी अपनी धरती कितनी खास है — इसका संतुलित तापमान, नीला पानी, सांस लेने योग्य हवा और हरे-भरे जंगल इसे अब तक ज्ञात ब्रह्मांड की सबसे अनोखी जगह बनाते हैं। अगर मानव जाति इस खोज से कुछ सीख सकती है, तो वह यह है कि हमें अपनी धरती की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारी अब तक की सबसे बड़ी “रहने योग्य” जगह है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज एक “लंबी यात्रा” है। हर नया ग्रह सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक संकेत है — कि ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन की चिंगारी हो सकती है। आज भले ही हम लाखों किलोमीटर दूर इन ग्रहों को दूरबीनों से देख रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में इंसान वहां कदम रख सकता है। जिस तरह कभी हमने चाँद और मंगल को छुआ, अब धरती जैसी नई दुनिया तक पहुंचना शायद विज्ञान का अगला बड़ा कदम होगा।

धरती जैसी दुनिया की यह खोज मानव जिज्ञासा, विज्ञान और उम्मीद का संगम है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि शायद हम अकेले नहीं हैं — कहीं दूर, किसी और तारों भरे आसमान के नीचे, कोई और सभ्यता भी हमारे जैसी दुनिया में सांस ले रही हो। और यही सोच इस “धरती की खोज” को सिर्फ़ विज्ञान नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा बना देती है — एक ऐसी यात्रा जो हमारी कल्पना से भी बड़ी है, और हमारे भविष्य से भी जुड़ी हुई।

 

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