नई दिल्ली, 25 सितंबर 2025
बीसीसीआई की चयन समिति ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ होने वाली आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। इस बार टीम में कुछ बड़े बदलाव हुए हैं, जबकि कुछ खिलाड़ियों की वापसी ने भी क्रिकेटप्रेमियों का ध्यान खींचा है। सबसे अहम बात यह है कि अनुभवी ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा को उपकप्तान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जडेजा लंबे समय से टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी रहे हैं और बल्ले-बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देते रहे हैं। उपकप्तानी मिलना यह दर्शाता है कि चयनकर्ता अब उनकी नेतृत्व क्षमता को भी मान्यता दे रहे हैं।
इस टीम में स्पिन विभाग पर विशेष जोर दिया गया है। अक्षर पटेल और नितीश कुमार रेड्डी की वापसी ने स्पिन विकल्पों को और गहराई दी है। अक्षर लंबे समय से चोट और फॉर्म के कारण बाहर थे, लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्होंने फिर से चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है। नितीश रेड्डी को भी एक बार फिर से टीम में शामिल किया गया है और उनसे युवा ऊर्जा और ताज़गी भरे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। इनके साथ ही कुलदीप यादव और वाशिंग्टन सुंदर को भी टीम में रखा गया है, जिससे स्पिन आक्रमण और भी मजबूत दिखाई देता है।
हालांकि, कुछ खिलाड़ियों को इस बार टीम से बाहर कर दिया गया है। इनमें करुण नायर, अभिमन्यु ईश्वरन और शार्दुल ठाकुर शामिल हैं। करुण नायर, जिन्होंने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत शानदार ट्रिपल सेंचुरी से की थी, लगातार मौके मिलने के बावजूद लय हासिल करने में असफल रहे हैं। अभिमन्यु ईश्वरन लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में अच्छा खेल रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अभी तक खुद को साबित करने का पर्याप्त मौका नहीं मिला है। वहीं, शार्दुल ठाकुर, जो टेस्ट टीम में एक ऑलराउंडर के रूप में शामिल रहते थे, इस बार चयनकर्ताओं की योजनाओं का हिस्सा नहीं बन पाए। यह बदलाव दर्शाता है कि टीम प्रबंधन अब तेज गेंदबाज़ों की जगह स्पिन विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है।
कप्तानी की जिम्मेदारी इस सीरीज़ में शुभमन गिल को दी गई है। गिल को लेकर यह संकेत साफ है कि चयनकर्ता उन्हें भविष्य का नेता मान रहे हैं। गिल ने हाल के वर्षों में अपनी बल्लेबाज़ी से प्रभावित किया है और अब उनके पास कप्तानी के रूप में खुद को साबित करने का सुनहरा मौका है। यह निर्णय भारतीय क्रिकेट के लिए नई दिशा तय कर सकता है, क्योंकि गिल जैसे युवा खिलाड़ी को इतनी जल्दी कप्तानी देना भविष्य की तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है।
टीम का स्वरूप साफ बताता है कि चयनकर्ता इस सीरीज़ को केवल एक प्रतियोगिता के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि आने वाले वर्षों की टेस्ट रणनीति का अभ्यास भी मान रहे हैं। स्पिन गेंदबाज़ों को प्राथमिकता देना इस बात की ओर इशारा है कि भारत उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में अपने पारंपरिक हथियार को और मजबूत करना चाहता है। वहीं, युवा खिलाड़ियों जैसे नितीश रेड्डी को शामिल कर टीम में नया खून लाना भी इसी योजना का हिस्सा है।
भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह सीरीज़ अहम होगी, क्योंकि यह केवल खिलाड़ियों की क्षमता की परीक्षा नहीं होगी बल्कि कप्तान शुभमन गिल और उपकप्तान रविंद्र जडेजा के नेतृत्व कौशल का भी परीक्षण करेगी। वेस्टइंडीज़ की टीम भले ही टेस्ट में उतनी मजबूत न मानी जाए, लेकिन विदेशी पिचों और माहौल में यह सीरीज़ टीम इंडिया के लिए किसी भी तरह से आसान नहीं होगी।




