सऊदी अरब ने उन देशों के फैसले का स्वागत किया है जिन्होंने हाल ही में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में आधिकारिक मान्यता दी है। इस सूची में फ्रांस, बेल्जियम, लग्ज़ेमबर्ग, माल्टा, मोनाको, एंडोरा और सैन मैरीनो जैसे यूरोपीय देश शामिल हैं।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इन मान्यताओं से यह साबित होता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब फिलिस्तीनी जनता के स्व-निर्धारण के अधिकार और स्वतंत्र राज्य की स्थापना को लेकर और अधिक गंभीर होता जा रहा है। मंत्रालय ने इस पहल को न केवल प्रतीकात्मक बल्कि शांति और स्थिरता की दिशा में ठोस कदम करार दिया।
बयान में आगे कहा गया कि फिलिस्तीन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना ही मध्य पूर्व में स्थायी शांति और सुरक्षा की नींव है। सऊदी अरब ने सभी देशों से अपील की है कि वे इस पहल में शामिल होकर फिलिस्तीनी जनता की आकांक्षाओं और उनके न्यायोचित अधिकारों का समर्थन करें।
सऊदी अरब ने यह भी दोहराया कि वह फिलिस्तीनी प्राधिकरण (Palestinian Authority) का समर्थन जारी रखेगा ताकि वह अपने प्रशासनिक और राजनीतिक दायित्वों को पूरा कर सके और “दो-राज्य समाधान” (Two-State Solution) को व्यवहार में लाने की दिशा में आगे बढ़ सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूरोप के प्रमुख देशों द्वारा फिलिस्तीन को दी गई यह मान्यता केवल राजनयिक बदलाव नहीं बल्कि इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान की संभावनाओं को नया आयाम देती है। इन देशों का यह रुख उस बढ़ते वैश्विक दबाव को दर्शाता है, जिसके तहत अब केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही मध्य पूर्व में स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सकती है। सऊदी अरब की यह प्रतिक्रिया साफ संकेत देती है कि अब दुनिया के बड़े हिस्से में यह समझ मजबूत हो रही है कि फिलिस्तीन की मान्यता ही शांति की राह का पहला पड़ाव है।




