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दिल्ली का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट: 3 बैंक, 22.92 करोड़ की ठगी और 4,236 ट्रांजेक्शन की खतरनाक साज़िश

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नई दिल्ली 23 सितंबर 2025

दिल्ली पुलिस ने उस मामले का खुलासा किया है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट कहा जा रहा है। यह हेडलाइन केवल सनसनी नहीं, बल्कि हकीकत है—एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को साइबर अपराधियों ने इस तरह फंसाया कि उसने अपने ही तीन बैंक खातों से करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए। कुल 22.92 करोड़ की यह ठगी 21 आरटीजीएस ट्रांजेक्शन और 4,236 छोटे-बड़े लेन-देन के जरिए अंजाम दी गई। इस खतरनाक धोखे ने राजधानी में साइबर सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरी साजिश की शुरुआत 1 अगस्त को हुई जब पीड़ित को एक महिला ने फोन कर बताया कि उनका लैंडलाइन नंबर आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद लगातार कॉल आने लगे और उन्हें चेतावनी दी गई कि उनके नाम से पुलवामा जैसे आतंकी हमले की फंडिंग हुई है। डर का माहौल ऐसा बनाया गया कि पीड़ित ने खुद को जांच एजेंसियों के शिकंजे में मान लिया। अपराधियों ने इसे “डिजिटल अरेस्ट” नाम दिया और पीड़ित को दिन-रात निगरानी में रहने के आदेश दिए।

धोखेबाजों ने कहा कि यदि वह निर्दोष हैं, तो उन्हें अपने सभी पैसे जांच एजेंसियों को “सत्यापन” के लिए भेजने होंगे। पीड़ित ने डर और दबाव में आकर सेंट्रल बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से कुल 21 बार आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर की। इस पैसे को 16 अलग-अलग खातों में बांटा गया और फिर सात परतों में घुमा-फिराकर आगे भेजा गया। पुलिस जांच में सामने आया कि कुल 22.92 करोड़ की राशि को 4,236 ट्रांजेक्शन में तोड़कर खिसकाया गया।

19 सितंबर को पीड़ित ने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामला दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion & Strategic Operations) शाखा के हवाले किया गया। अब तक करीब 2.67 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज किया गया है, लेकिन बाकी रकम का कोई सुराग नहीं मिला है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि साइबर अपराधियों की एक ऐसी नई चाल है, जिसमें डर और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को उनकी जमा पूंजी से वंचित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम अब भारत में तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को सजग रहने की जरूरत है।

यह घटना साबित करती है कि एक कॉल आपकी जिंदगी भर की कमाई पर पानी फेर सकती है। कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा तंत्र के लिए यह घटना एक अलार्म बेल है कि अपराधियों ने अब ठगी के लिए नया हथियार खोज लिया है।

 

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