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???? ब्रेकिंग न्यूज़: फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की दहलीज़ पर ब्रिटेन

लंदन, 21 सितंबर 2025

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर आज रविवार दोपहर फिलिस्तीनी राज्य को औपचारिक मान्यता देने वाले हैं। आधी रात के बाद से ही लंदन में हलचल तेज़ है और माना जा रहा है कि कुछ ही घंटों में यह ऐतिहासिक घोषणा हो जाएगी।

जुलाई में ही स्टार्मर ने चेतावनी दी थी कि अगर इजरायल सितंबर तक गाजा में युद्धविराम और दो-राज्य समाधान पर आगे नहीं बढ़ता, तो ब्रिटेन अपना रुख बदल देगा। गाजा में भूखमरी, हिंसा और पश्चिमी तट पर बढ़ती अवैध बस्तियों ने इस फैसले को लगभग अनिवार्य बना दिया है। जस्टिस सेक्रेटरी डेविड लैमी ने खासतौर पर E1 बस्ती परियोजना का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने फिलिस्तीनी राज्य की राह में सबसे बड़ा अवरोध बताया।

घोषणा का समय और पृष्ठभूमि

यह फैसला ऐसे वक्त आ रहा है जब यूएन महासभा की बैठकें 23 सितंबर से शुरू होने वाली हैं। स्टार्मर वहां इजरायल से युद्धविराम और शांति प्रतिबद्धता की मांग करेंगे। इससे पहले उन्होंने आठ-सूत्री शांति योजना रखी थी, जिसमें युद्ध रोकना, मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान शामिल था।

अंतरराष्ट्रीय महत्व

यूएन के 193 सदस्य देशों में से करीब 75% देश पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। अब ब्रिटेन जैसे बड़े पश्चिमी देश का शामिल होना कूटनीतिक तौर पर भारी महत्व रखता है। फिलहाल फिलिस्तीन की तय सीमाएं, राजधानी और सेना नहीं है, इसलिए यह मान्यता मुख्य रूप से प्रतीकात्मक और नैतिक कदम मानी जा रही है।

विवाद और प्रतिक्रियाएं

  1. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कदम को “आतंकवाद को इनाम” बताया।
  1. कंजर्वेटिव नेता केमी बैडेनॉक ने लिखा कि यह फैसला बंधकों की रिहाई को और मुश्किल बना देगा।
  1. हमास द्वारा अगवा किए गए 48 बंधकों के परिजनों ने स्टार्मर से अपील की है कि वह यह घोषणा रोक दें।
  1. चीफ रब्बी सर एफ्रेम मिर्विस ने कहा कि बिना शांति समझौते और बंधकों की रिहाई के मान्यता देना गलत होगा।
  1. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी असहमति जताई, लेकिन इसे बड़ा मुद्दा नहीं बनाया।
  1. फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने ब्रिटेन के इस रुख का स्वागत किया है।

असर और निहितार्थ

ब्रिटेन का यह कदम इजरायल-ब्रिटेन संबंधों को गंभीर तनाव की ओर धकेल सकता है और बंधक वार्ताओं की दिशा भी बदल सकता है। हालांकि, समर्थकों का मानना है कि यही सही समय है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो-राज्य समाधान बचाने के लिए निर्णायक दबाव बनाना चाहिए। जस्टिस सेक्रेटरी लैमी ने साफ कहा: “पश्चिमी तट पर बस्तियों का विस्तार और सेटलर हिंसा दो-राज्य समाधान को पूरी तरह समाप्त कर रहे हैं। अगर अभी कदम नहीं उठाया गया तो शांति का सपना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।” यह घोषणा ब्रिटेन की विदेश नीति में ऐतिहासिक मोड़ है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी बदल सकती है। दुनिया की निगाहें अब दोपहर की घोषणा और उसके बाद की कूटनीतिक हलचलों पर टिकी हुई हैं।

 

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