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रेबिज़ वैक्सीन के बावजूद मौतों का मामला: डॉक्टरों ने दी चेतावनी, बताया बचाव और इलाज का सही तरीका

नई दिल्ली 20 सितंबर 2025

 रेबिज़ (कुत्ते और अन्य जंगली जानवरों से फैलने वाला रोग) के मामलों में हाल ही में मौतों की घटनाएँ सामने आई हैं, हालांकि पीड़ितों को वैक्सीन भी लग चुकी थी। यह सवाल उठ रहा है कि वैक्सीन मिलने के बावजूद मौतें क्यों हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल वैक्सीन पर भरोसा करने या उपचार के सही क्रम का पालन न करने के कारण हो रहा है।

डॉक्टरों का चेतावनी संदेश

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि रेबिज़ संक्रमण के बाद सही समय पर और पूरी प्रक्रिया के अनुसार इलाज लेना बेहद ज़रूरी है। केवल वैक्सीन लगवाना ही पर्याप्त नहीं है। अगर काटने या खरोंच लगने के तुरंत बाद प्राथमिक सफाई, डॉक्टर से तुरंत संपर्क और आवश्यक इम्यूनोग्लोबिन/टीका पूरा न किया गया, तो वैक्सीन की प्रभावशीलता कम हो जाती है।

रोकथाम और इलाज में लापरवाही खतरनाक

डॉक्टरों ने बताया कि रेबिज़ के संक्रमण में शुरुआती इलाज में देरी, घाव की सफाई न करना, वैक्सीन या इम्यूनोग्लोबिन का अधूरा कोर्स लेने जैसे कदम सीधे मृत्यु की ओर ले जा सकते हैं। कई बार लोग घर पर ही घाव को नज़रअंदाज कर देते हैं या वैक्सीन शेड्यूल पूरा नहीं करते, जिससे संक्रमण गंभीर हो जाता है।

वैक्सीन की सीमाएँ

वैक्सीन अत्यंत प्रभावी है, लेकिन यह तभी काम करती है जब सही समय पर और निर्धारित डोज़ के अनुसार दी जाए। रेबिज़ संक्रमण बहुत तेजी से शरीर में फैलता है, और अगर वायरस स्नायु तंत्र तक पहुँच जाए, तो उपचार बहुत कठिन हो जाता है। यही कारण है कि कुछ मामलों में वैक्सीन मिलने के बावजूद मौतें हो रही हैं।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि रेबिज़ से बचाव के लिए सबसे प्रभावी उपाय है:

  1. किसी भी काटने या खरोंच लगने के तुरंत बाद घाव को साफ पानी और साबुन से धोना।
  2. तुरंत नज़दीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर से संपर्क करना।
  3. संपूर्ण वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबिन कोर्स समय पर पूरा करना।
  4. पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण और जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखना।

रेबिज़ के मामले में मौतें वैक्सीन की कमी से नहीं, बल्कि उचित उपचार और सावधानी के अभाव से हो रही हैं। डॉक्टरों ने जनता से आग्रह किया है कि काटने या खरोंच लगने पर कोई समय न गवाएं और पूरी सावधानी बरतें।

 

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