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“तुम कौन हो, यह मत भूलो”: रोहित शर्मा की एक बात ने बदल दी यशस्वी जायसवाल की राह

भारतीय क्रिकेट में नई ऊर्जा और उम्मीद का नाम बन चुके यशस्वी जायसवाल के जीवन में पिछले महीने एक ऐसा मोड़ आया जिसने न केवल उनके करियर की दिशा बदली, बल्कि उन्हें फिर से उनके संघर्ष, उनकी मिट्टी और उनकी पहचान से जोड़ दिया। मुंबई की गलियों से लेकर भारतीय टेस्ट टीम तक का सफर तय करने वाले इस युवा बल्लेबाज़ ने हाल ही में घरेलू क्रिकेट की राजनीति और चयन विवादों से निराश होकर मुंबई छोड़ने का निर्णय लगभग पक्का कर लिया था। वे गोवा की ओर रुख करने को तैयार थे — एक नई शुरुआत, एक नया माहौल। लेकिन तभी, भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का एक फोन कॉल आया, जिसने यशस्वी को न सिर्फ सोचने पर मजबूर किया बल्कि उनके भीतर की जड़ें हिला दीं। यह महज एक बातचीत नहीं थी, यह एक अनुभवी कप्तान द्वारा एक युवा खिलाड़ी को उसकी आत्मा से जोड़ने की पहल थी।

यशस्वी ने खुद इस भावुक क्षण को साझा करते हुए बताया, “मैं बेहद टूट चुका था। मुझे लग रहा था कि मेरी मेहनत को नजरअंदाज़ किया जा रहा है। मैं मुंबई छोड़कर गोवा में खेलने का मन बना चुका था। तभी रोहित भाई का कॉल आया। उन्होंने कहा, ‘तुम कौन हो, यह मत भूलो। तुम्हें जिस मिट्टी ने तैयार किया, जिसे पापड़ बेचते हुए तुमने अपने खून-पसीने से सींचा, उसे यूं छोड़ना तुम्हारे संघर्ष का अपमान होगा।’” यह शब्द सिर्फ उपदेश नहीं थे — यह उस बच्चे के कान में गूंजते सच थे, जिसने कभी आज़ाद मैदान के पास फुटपाथ पर रातें काटी थीं, सिर्फ इस सपने के लिए कि एक दिन भारत के लिए खेलेगा। रोहित की यह आवाज़ यशस्वी के भीतर बैठी हुई निष्ठा को जगा गई। उन्होंने महसूस किया कि मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, उनकी आत्मा है।

सिर्फ एक महीने के भीतर यशस्वी ने अपनी दिशा बदल दी। गोवा जाने की योजना छोड़ दी और मुंबई के लिए खुद को फिर से समर्पित कर दिया। यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं था, यह भावनात्मक और नैतिक स्तर पर भी गहरा था। “रोहित भाई ने मुझे मेरी पहचान याद दिलाई,” यशस्वी ने स्वीकार किया। यह पहचान केवल एक खिलाड़ी की नहीं थी, बल्कि उस पूरे संघर्ष की थी जिसे वह हर चौके और हर शतक में जिया करते हैं। ऐसे दौर में जब युवा खिलाड़ी अकसर सुविधाओं की तलाश में टीम बदल देते हैं, यशस्वी का यह कदम नज़ीर बन गया है।

मुंबई क्रिकेट संघ (MCA) ने यशस्वी के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया और इसे ‘अपने खिलाड़ी का घर वापसी’ कहा। वहीं बीसीसीआई ने भी इस घटना को भारतीय क्रिकेट में सीनियर खिलाड़ियों की मेंटरशिप का एक आदर्श उदाहरण बताया। बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, “यह इस बात का प्रमाण है कि रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी केवल कप्तान नहीं, बल्कि एक संरक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका में हैं, जो युवा प्रतिभाओं को समय-समय पर राह दिखाते हैं।”

 

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