अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन/नई दिल्ली | 8 नवंबर 2026
अमेरिका में अरबपतियों की संपत्ति पर टैक्स लगाकर आम परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने हालिया लेख में कहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को सत्ता मिलने पर अरबपतियों पर 5 प्रतिशत वेल्थ टैक्स लगाकर कामकाजी परिवारों को आर्थिक मदद देनी चाहिए। उन्होंने चार सदस्यों वाले परिवार के लिए 12,000 डॉलर की प्रत्यक्ष सहायता का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रस्ताव की तुलना भारत में राहुल गांधी की ओर से 2019 के लोकसभा चुनाव में घोषित न्यूनतम आय योजना यानी NYAY से की जा रही है। दोनों योजनाओं की मूल सोच में एक समानता है—संपन्न वर्ग पर टैक्स लगाकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक सीधे नकद सहायता पहुंचाना। हालांकि दोनों योजनाओं के लाभार्थियों और आर्थिक ढांचे में अंतर है।
सैंडर्स का प्रस्ताव: अरबपतियों पर 5% टैक्स
बर्नी सैंडर्स और अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने 2 मार्च 2026 को ‘Make Billionaires Pay Their Fair Share Act’ नाम से विधेयक पेश किया था। इसके तहत अमेरिका के 938 अरबपतियों की कुल संपत्ति पर सालाना 5 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है।
इस विधेयक के मुताबिक, पहले साल में 150,000 डॉलर या उससे कम वार्षिक आय वाले परिवारों के प्रत्येक सदस्य को 3,000 डॉलर की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस हिसाब से चार सदस्यों वाले परिवार को कुल 12,000 डॉलर मिलेंगे। प्रस्ताव से जुटाई गई अनुमानित 4.4 ट्रिलियन डॉलर की राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं, किफायती आवास, बच्चों की देखभाल और शिक्षा जैसी जरूरतों पर भी किया जाना है।
सैंडर्स ने अपने हालिया लेख में भी कहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत मिलने पर अरबपतियों पर 5 प्रतिशत वेल्थ टैक्स लगाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे कामकाजी परिवारों को आर्थिक राहत दी जा सकती है।
राहुल गांधी की 2019 की NYAY योजना
भारत में राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले न्यूनतम आय योजना यानी NYAY की घोषणा की थी। कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में देश के सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों को सालाना 72,000 रुपये देने का वादा किया गया था। इस योजना के तहत करीब पांच करोड़ परिवारों और 25 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था।
योजना के मुताबिक, प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना 72,000 रुपये यानी औसतन 6,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जानी थी। कांग्रेस ने यह भी प्रस्ताव रखा था कि यथासंभव राशि परिवार की महिला सदस्य के बैंक खाते में भेजी जाए।
दोनों प्रस्तावों में क्या है समानता?
बर्नी सैंडर्स के प्रस्ताव और राहुल गांधी की NYAY योजना में सबसे महत्वपूर्ण समानता प्रत्यक्ष नकद सहायता का विचार है। दोनों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ाने और गरीबी से राहत देने के लिए सीधे बैंक खातों में पैसा पहुंचाने की अवधारणा है।
लेकिन दोनों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी हैं। सैंडर्स का प्रस्ताव अमेरिका के उन परिवारों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 150,000 डॉलर या उससे कम है, जबकि NYAY का लक्ष्य भारत के सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवार थे। सैंडर्स ने अरबपतियों की संपत्ति पर 5 प्रतिशत वार्षिक टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है, जबकि कांग्रेस ने NYAY के लिए नए राजस्व स्रोतों और सरकारी खर्च के पुनर्गठन की बात कही थी।
‘राहुल गांधी आज सोचते हैं, दुनिया कल’
सैंडर्स के प्रस्ताव और राहुल गांधी की पुरानी योजना की समानता को लेकर सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी की जा रही है कि राहुल गांधी ने जिस आर्थिक विचार को 2019 में भारत के सामने रखा था, उसी तरह की सोच अब अमेरिका में भी सामने आ रही है।
हालांकि दोनों प्रस्तावों को एक जैसी योजना कहना सही नहीं होगा, लेकिन गरीब और कामकाजी परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता देने तथा संपत्ति के असमान वितरण को कर नीति के जरिए संबोधित करने का विचार दोनों में दिखाई देता है।
राहुल गांधी की NYAY योजना 2019 में चुनावी वादे के रूप में सामने आई थी, जबकि सैंडर्स और रो खन्ना का प्रस्ताव अमेरिका में विधेयक के रूप में पेश किया जा चुका है। दोनों देशों में इस तरह की योजनाओं पर बहस का केंद्र एक ही सवाल है—बढ़ती आर्थिक असमानता के दौर में देश की संपत्ति का लाभ आम परिवारों तक कैसे पहुंचाया जाए।



