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ओवैसी-मायावती की जुगलबंदी से किसे होगा फायदा?

विपक्ष के वोट काटने की राजनीति के बीच ‘भीम-मीम’ गठबंधन की तैयारी, अखिलेश यादव को घेरने में जुटे ओवैसी

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 7 नवंबर 2026

असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM एक बार फिर उत्तर प्रदेश में विपक्षी वोटों को प्रभावित करने की रणनीति के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है। ओवैसी की पार्टी पर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि वह बीजेपी की बी टीम की तरह काम करती है और उन सीटों पर विपक्षी वोट काटती है, जहां इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। अब समाजवादी पार्टी से गठबंधन की उम्मीद खत्म होने के बाद ओवैसी की नजर मायावती की बहुजन समाज पार्टी पर है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, AIMIM उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मायावती की BSP और नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। ओवैसी अपनी सभाओं में लगातार अखिलेश यादव को निशाना बना रहे हैं। उनका आरोप है कि समाजवादी पार्टी चुनाव के समय मुसलमानों के वोट तो लेती है, लेकिन सत्ता और राजनीतिक हिस्सेदारी के सवाल पर उन्हें नजरअंदाज करती है।

मायावती के साथ गठबंधन की कोशिशों ने एक बार फिर उनकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले को लेकर राजनीतिक दबाव में रहने वाली मायावती अक्सर बीजेपी के सामने नरम रुख अपनाती रही हैं। विपक्षी एकजुटता से दूरी और अलग चुनाव लड़ने की उनकी रणनीति का नतीजा कई बार बीजेपी विरोधी वोटों के बंटवारे के रूप में सामने आया है। इसे आलोचक बीजेपी से राजनीतिक इम्युनिटी हासिल करने और विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति के तौर पर देखते हैं।

अब ओवैसी और मायावती के बीच संभावित तालमेल की चर्चा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। सवाल यह है कि ‘भीम-मीम’ के नाम पर तैयार होने वाला यह नया राजनीतिक समीकरण वास्तव में किसके हित में काम करेगा और इसका सबसे बड़ा असर किसके चुनावी आधार पर पड़ेगा।

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