तारीख: 25 जून 2025
चेन्नई — तमिलनाडु में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (Right to Education – RTE) से संबंधित विवाद ने राज्य की हजारों छात्राओं की शिक्षा को संकट में डाल दिया है। इस विवाद में कई निजी स्कूलों ने RTE के तहत नामांकन देने से इनकार कर दिया, जिससे हजारों लड़कियां स्कूल से बाहर हो गईं।
शिक्षा विभाग और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण यह मामला गंभीर रूप ले चुका है। सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं पर पड़ा है, जहां शिक्षा पहले से ही एक चुनौतीपूर्ण मुद्दा है।
यह एक मानवीय संकट बन चुका है, क्योंकि इससे लड़कियों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। बालिका शिक्षा में यह गिरावट सामाजिक असमानता को और अधिक बढ़ा सकती है।
शिक्षाविदों और महिला अधिकार संगठनों ने राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस दिशा में शीघ्र कदम नहीं उठाए गए, तो एक पूरी पीढ़ी की लड़कियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
सरकार ने जांच समिति गठित करने की घोषणा की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।




