राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर विपक्ष पर निशाना साधते नजर आए। सरकार और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के लगातार सवालों के बीच मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा में कहा कि कुछ लोग देशभर में अराजकता पैदा करना चाहते हैं, ताकि मोदी को बदनाम किया जा सके। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की भूमिका और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है।
सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष पर आरोप?
भिलड़ी गांव में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश में अव्यवस्था पैदा करके मोदी को बदनाम करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह जीवन के आखिरी क्षण तक देश की सेवा करते रहेंगे।
मोदी का यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हालिया टिप्पणी के बाद आया है। बिहार के पटना में खड़गे की टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक विवाद चल रहा है।
12 साल के शासन का हिसाब कौन देगा?
प्रधानमंत्री को सत्ता में आए 12 साल से अधिक समय हो चुका है। ऐसे में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, आर्थिक चुनौतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है।
लेकिन जब भी विपक्ष चुनावी प्रक्रिया या चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, तो बहस का केंद्र आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी की ओर मुड़ जाता है। असली सवाल यह है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों और वोटर के अधिकारों पर उठाए गए सवालों का स्पष्ट जवाब कब मिलेगा?
वोट चोरी के आरोपों पर बढ़ा राजनीतिक टकराव
विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता की मांग कर रहा है। SIR के दौरान नाम हटाने, फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को कथित वोट चोरी से जोड़कर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साध रहा है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित संस्थाओं के जवाब के बाद ही निकाला जा सकता है।
अमित शाह ने दी विशेष संसद सत्र में बहस की चुनौती
इसी बीच लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर संसद के विशेष सत्र में चर्चा करने की चुनौती दी। इससे साफ है कि चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा अब सड़क से संसद तक राजनीतिक टकराव का बड़ा केंद्र बन चुका है।
रविवार की रैली से पहले सियासी गर्मी
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को प्रस्तावित INDIA bloc की रैली से पहले प्रधानमंत्री का यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में है।
लोकतंत्र में सरकार की आलोचना देश को बदनाम करना नहीं होती। जनता के सवालों का जवाब देना और संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना सत्ता की जिम्मेदारी है। विपक्ष के आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला तथ्यों और जांच से होना चाहिए—लेकिन सवाल पूछने वालों को अराजकता फैलाने वाला बताकर बहस खत्म नहीं की जा सकती।



