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गाजा में युद्धविराम के बाद भी इजरायल पर युद्ध अपराध और नरसंहार जारी रखने का आरोप, संयुक्त राष्ट्र आयोग की रिपोर्ट

75 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत का दावा, इनमें कम से कम 21,500 बच्चे और 11 हजार महिलाएं शामिल; वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई और बस्तियों के विस्तार को भी बताया गया फिलिस्तीनियों के खिलाफ सुनियोजित अभियान

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026

गाजा में युद्धविराम समझौते के बावजूद फिलिस्तीनियों पर इजरायली कार्रवाई थमने का नाम नहीं ले रही है। संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इजरायली अधिकारी और सैन्य बल युद्धविराम के बाद भी कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार जैसे गंभीर अपराध जारी रखे हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा के साथ-साथ वेस्ट बैंक में भी इजरायली सैन्य अभियान और इजरायली बस्तियों से जुड़े लोगों की हिंसा फिलिस्तीनियों के खिलाफ एक व्यापक और समन्वित कार्रवाई का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, इस कार्रवाई का उद्देश्य फिलिस्तीनी जमीन पर कब्जे को मजबूत करना, क्षेत्र पर कब्जा बढ़ाना और फिलिस्तीनी आबादी को विस्थापित करना है।

75 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत का दावा

न्यायमूर्ति श्रीनिवासन मुरलीधर की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र आयोग ने बताया कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में 75 हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें कम से कम 21,500 बच्चे और 11 हजार महिलाएं शामिल हैं।

रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत और मानवीय संकट को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। आयोग ने कहा कि युद्धविराम के बाद भी गाजा में इजरायली सैन्य नियंत्रण का विस्तार जारी है, जिससे आम फिलिस्तीनी नागरिकों की जान को खतरा बना हुआ है।

येलो लाइन के पास जाने पर भी नागरिकों की जान खतरे में

रिपोर्ट में गाजा के भीतर बनी ‘येलो लाइन’ का भी जिक्र किया गया है। यह रेखा इजरायली सैन्य नियंत्रण वाले हिस्से और फिलिस्तीनी प्रशासन वाले क्षेत्र के बीच विभाजन करती है।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मुरलीधर के अनुसार, इजरायली बलों ने इस क्षेत्र में अपना नियंत्रण लगातार बढ़ाया है। येलो लाइन के पास पहुंचने या उसे पार करने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की हत्या और उन्हें घायल किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।

वेस्ट बैंक में भी कार्रवाई पर गंभीर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि वेस्ट बैंक में इजरायली सैन्य अभियान और बस्तियों से जुड़े लोगों की हिंसा को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। आयोग ने इन्हें फिलिस्तीनियों के खिलाफ एक समन्वित अभियान का हिस्सा बताया है।

इसके पीछे फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायली बस्तियों का विस्तार, जमीन पर नियंत्रण बढ़ाना और स्थानीय आबादी को विस्थापित करने की मंशा बताई गई है।

युद्धविराम के बाद भी नहीं थमा मानवीय संकट

गाजा में युद्धविराम से लोगों को राहत और सुरक्षा की उम्मीद थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र आयोग की रिपोर्ट ने हालात को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम का मतलब यह नहीं हुआ कि फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ हिंसा और सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त हो गई।

संयुक्त राष्ट्र आयोग के निष्कर्षों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि युद्धविराम के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोपों पर जवाबदेही कैसे तय होगी।

रिपोर्ट में लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच अब निगाहें संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अगली कार्रवाई पर हैं। फिलिस्तीनियों की सुरक्षा, विस्थापन रोकने और कथित युद्ध अपराधों की जवाबदेही तय करना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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