राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
देश की बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। अगले साल 25 जनवरी से देशभर में घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना शुरू होगी। इस दौरान जनगणना कर्मचारी लोगों से कुल 40 सवाल पूछेंगे। इनमें जाति, धर्म, माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान से लेकर बैंक खातों, डिजिटल साक्षरता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों तक की जानकारी शामिल होगी। खास बात यह है कि इस बार 13 नए सवाल जोड़े गए हैं, जिनमें से कई पहली बार जनगणना का हिस्सा बनेंगे।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, जनगणना 2027 के दूसरे और अंतिम से पहले चरण यानी जनसंख्या गणना की प्रक्रिया 10 जनवरी 2027 से शुरू होगी। घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का अभियान 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे निर्धारित की गई है।
जाति और धर्म से लेकर आधार तक की जानकारी
इस बार जनगणना में जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही धर्म, माता-पिता का जन्मस्थान और जन्मतिथि, जीवनसाथी का नाम और राष्ट्रीयता से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे।
पहली बार लोगों से डिजिटल साक्षरता, बैंक खातों की संख्या, स्थायी निवास का पता, कोविड-19 टीकाकरण के स्थान और पासपोर्ट तथा ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी मांगी जाएगी।
इसके अलावा मोबाइल नंबर, आधार नंबर और मतदाता पहचान पत्र का नंबर भी पूछा जाएगा, यदि संबंधित व्यक्ति के पास ये दस्तावेज उपलब्ध हैं।
10 जनवरी से मिलेगा ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प
जनगणना की प्रक्रिया में लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा। इसके लिए पोर्टल 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक उपलब्ध रहेगा। इस अवधि में नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
इसके बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। जरूरत पड़ने पर 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक पुनरीक्षण का दौर भी चलेगा।
चार चुनावी राज्यों में पहले शुरू होगी जनगणना
उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों को देखते हुए इन राज्यों में जनगणना की प्रक्रिया बाकी देश से पहले शुरू की जाएगी।
इन चार राज्यों में 16 नवंबर 2026 से स्व-गणना पोर्टल उपलब्ध होगा। इसके बाद 1 दिसंबर से घर-घर जाकर गणना शुरू होगी, जो 5 जनवरी 2027 तक चलेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?
जनगणना केवल देश की आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है। इससे सरकार को जनसंख्या की संरचना, सामाजिक और आर्थिक स्थिति, आवास, शिक्षा, सुविधाओं और विभिन्न समुदायों से जुड़े आंकड़े मिलते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण और विकास की नीतियों को तैयार करने में मदद मिलती है।
जाति से जुड़े सवालों और आधार, मोबाइल तथा मतदाता पहचान पत्र जैसी जानकारियों को शामिल किए जाने के कारण इस बार की जनगणना पर विशेष नजर रहेगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नागरिकों की निजी जानकारी किस तरह एकत्र की जाती है और उसकी गोपनीयता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं।



