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नेतन्याहू का सनसनीखेज दावा—‘अरब पार्टियों ने इजराइल का चुनाव चुरा लिया’, जांच की मांग से सियासी भूचाल

77.7% रिकॉर्ड मतदान के बाद सत्ता पर संकट, अरब पार्टियों को 19 सीटें; नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और विपक्ष को 48 सीटें, सरकार गठन में अरब दलों की भूमिका निर्णायक

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | यरुशलम | 29 अक्टूबर 2026

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संसदीय चुनाव के नतीजों के बीच सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि अरब पार्टियों ने चुनाव ‘चुरा लिया’। उनकी पार्टी लिकुड ने अरब मतदान केंद्रों पर कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से जांच की मांग की है। दूसरी ओर, अरब नेतृत्व वाले जॉइंट लिस्ट गठबंधन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव में कोई अनियमितता नहीं हुई। इस घटनाक्रम ने इजराइल की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है, जहां चुनावी नतीजों ने नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

बहुमत से दूर नेतन्याहू का गठबंधन

मतगणना के शुरुआती रुझानों के अनुसार, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिली हैं। अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं। इजराइल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में कोई भी खेमा अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाया है और अगली सरकार का भविष्य गठबंधन की बातचीत पर निर्भर करेगा।

नेतन्याहू ने लगाए गंभीर आरोप, जांच की मांग

नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में दावा किया कि अरब मतदान केंद्रों पर रिश्वत, धमकी, हिंसा, फर्जी दस्तावेजों और एक से अधिक बार मतदान जैसी अनियमितताएं हुईं। पार्टी ने कहा कि वह इन दावों के समर्थन में सैकड़ों गवाहियां और साक्ष्य संबंधित एजेंसियों को सौंपेगी। लिकुड ने चुनाव की निष्पक्षता और परिणामों की जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जॉइंट लिस्ट के नेता अहमद तिबी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में कोई अनियमितता नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अरब पार्टियों को मिले वोटों को अवैध ठहराने की कोशिश की जा रही है। इस तरह चुनावी नतीजों के साथ-साथ अरब नागरिकों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

अरब पार्टियों की 19 सीटें बन सकती हैं सत्ता की चाबी

इस चुनाव में अरब नागरिकों की भारी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक रही। एग्जिट पोल के अनुसार, अरब मतदाताओं का मतदान करीब 80% तक पहुंचा, जबकि देश में कुल मतदान 77.7% दर्ज किया गया। यह 1999 के बाद इजराइल में सबसे अधिक मतदान है।

प्रारंभिक नतीजों के मुताबिक, अरब नेतृत्व वाले जॉइंट लिस्ट गठबंधन को 12 सीटें और मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली राम पार्टी को सात सीटें मिलने का अनुमान है। दोनों की कुल 19 सीटें सरकार गठन के समीकरण में निर्णायक हो सकती हैं।

विपक्ष के सामने चुनौती: अरब दलों के साथ सरकार बनाए या नहीं?

आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे और अरब पार्टियों की संयुक्त संख्या 67 सीटों तक पहुंचती है, जो बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से अधिक है। लेकिन इन सीटों का जोड़ अपने आप में सरकार बनने की गारंटी नहीं है। इसके लिए राजनीतिक सहमति और संसदीय समर्थन जुटाना जरूरी होगा।

आइज़ेनकोट चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर अनिच्छा जता चुके हैं। वहीं, राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी अगली सरकार में भूमिका निभाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन संसद में बाहर से समर्थन देने की संभावना खुली रखी है।

अरब मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी ने बदला राजनीतिक समीकरण

इजराइल की आबादी में अरब नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग पांचवां भाग है। इस चुनाव में उनकी बड़ी भागीदारी और अरब पार्टियों की बढ़ी हुई सीटों ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल फिर केंद्र में ला दिया है। अरब दलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले नागरिकों की राजनीतिक आवाज को सरकार गठन के समय नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, नेतन्याहू और उनके सहयोगी अरब पार्टियों के साथ सत्ता साझा करने के खिलाफ रहे हैं। यही राजनीतिक मतभेद नई सरकार के गठन में बड़ी बाधा बन सकता है।

चुनावी अनिश्चितता का असर बाजार पर भी

चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद इजराइल के वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी गई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इजराइली शेकेल लगभग 2% कमजोर होकर 3.1185 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। तेल अवीव का प्रमुख शेयर सूचकांक करीब 3% गिरा और इजराइली बॉन्ड में भी कमजोरी दर्ज की गई।

बाजारों की प्रतिक्रिया इस अनिश्चितता को दर्शाती है कि अगली सरकार किस दिशा में जाएगी और मौजूदा सुरक्षा तथा विदेश नीति में कितना बदलाव होगा। अंतिम परिणाम और गठबंधन की बातचीत पूरी होने तक आर्थिक बाजारों में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है।

राष्ट्रपति की अपील, नई सरकार के गठन पर नजर

इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों से मिलकर सरकार बनाने और देश को एक और चुनाव की स्थिति से बचाने की अपील की है। आधिकारिक नतीजे आने के बाद वह विभिन्न दलों के नेताओं से परामर्श करेंगे। यदि कोई गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाता, तो नेतन्याहू नई सरकार बनने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

फिलहाल इजराइल की राजनीति तीन बड़े सवालों से जूझ रही है—क्या नेतन्याहू अपना गठबंधन बचा पाएंगे, क्या विपक्ष अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने के लिए तैयार होगा और क्या अरब नागरिकों की बढ़ी हुई राजनीतिक भागीदारी सत्ता की संरचना में वास्तविक बदलाव ला सकेगी?

नेतन्याहू के ‘चुनाव चुराने’ वाले बयान ने चुनाव के बाद के राजनीतिक संघर्ष को और तीखा कर दिया है। लेकिन अंतिम तस्वीर आधिकारिक नतीजों, जांच की प्रक्रिया और सरकार गठन के लिए होने वाले राजनीतिक समझौतों से ही स्पष्ट होगी।

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